राजस्थान के जलदाय मंत्री कन्हैयालाल चौधरी ने शुक्रवार को राजस्थान विधानसभा में कहा कि मेरे विभाग में इस लेवल का भ्रष्टाचार है कि यदि नीचे तक गया तो एक भी अफसर नहीं बचेगा। लेकिन मुझे विभाग चलाना है। 40 कार्मिकों को तो अब तक निलंबित कर चुका हूं। हालांकि, उन्होंने इस भ्रष्टाचार का ठीकरा पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार को फोड़ा।
राजस्थान विधानसभा में दो दिन तक चली पानी पर चर्चा का जवाब देते हुए चौधरी ने कहा कि भूभाग की दृष्टि से सबसे बड़ा राज्य होने के बाद भी राजस्थान में देश में उपलब्ध जल का महज 1.6 प्रतिशत ही पानी है। जल जीवन मिशन राज्य के लिए सबसे उपयोगी साबित होता, लेकिन पूर्ववर्ती सरकार ने इसमें केन्द्र से आए पैसे में से महज 20 प्रतिशत ही राशि खर्च की। पानी का इंतजाम किए बिना ही टंकियां, पाइप लाइन निर्माण कर दिया।
पिछली राज्य सरकार के दौरान तत्कालीन केन्द्रीय जलशक्ति मंत्री ने ईस्टर्न राजस्थान कैनाल प्रोजेक्ट को भी नदी जोड़ो परियोजना में शामिल करने की सहमति दी। लेकिन राज्य सरकार राजी नहीं हुई। अब हमारी सरकार बनते ही त्रिपक्षीय एमओयू हुआ। अब संशोधित पार्वती-काली सिंध-चम्बल (पीकेसी) लिंक परियोजना की डीपीआर तैयार हो रही है। इससे राज्य को 3400 मिलियन क्यूबिक मीटर (एमसीएम) पानी मिलेगा। चौधरी ने कहा कि उनके विभाग में 25 हजार पदों पर भर्ती का प्रस्ताव मांगा गया है। विभिन्न तकनीकी पदों के साथ ही अभियंताओं के पदों पर भर्ती की जाएगी।