राजस्थान में वोटरों की संख्या कम हुई
- फोटो : अमर उजाला
राजस्थान में मतदाता सूचियों को लेकर बड़ा अंतर सामने आया है। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद निर्वाचन आयोग (EC) की अंतिम सूची में मतदाताओं की संख्या करीब 5.15 करोड़ रह गई, जबकि स्थानीय निकाय चुनावों के लिए राज्य निर्वाचन आयोग (SEC) की ओर से इस्तेमाल की गई सूची में करीब 5.45 करोड़ मतदाता दर्ज हैं। दोनों सूचियों के आंकड़ों में करीब 30 लाख का अंतर है। इस अंतर को लेकर सवाल उठने लगे हैं कि जब एसआईआर के बाद मतदाताओं की नई सूची जारी हो चुकी थी, तो निकाय चुनाव में पुरानी सूची का इस्तेमाल क्यों किया गया?
सामाजिक कार्यकर्ता निखिल डे ने बताया कि एसआईआर से पहले निर्वाचन आयोग की मतदाता सूची में राजस्थान में करीब 5.47 करोड़ मतदाता थे। पुनरीक्षण के बाद यह संख्या घटकर करीब 5.15 करोड़ रह गई। यानी करीब 32 लाख मतदाताओं की कमी दर्ज हुई। दूसरी ओर, राज्य निर्वाचन आयोग की निकाय चुनाव वाली सूची में करीब 5.45 करोड़ मतदाता बने रहे। इस तरह SIR के बाद की सूची और निकाय चुनाव में इस्तेमाल हुई सूची के बीच लगभग 30 लाख मतदाताओं का अंतर सामने आया है।
ये भी पढ़ें-
आरपीएससी: पांच विषयों की मॉडल आंसर की जारी, 10 नवंबर रात 12 बजे तक दर्ज कराएं आपत्ति
उन्होंने बताया कि इस पूरी पद्दति पर हमारी बहुत बड़ी आपत्ति है। राज्य निर्वाचन आयोग ( एसईसी) का अधिकार है कि वह चुनावों के लिए अपनी लिस्ट बनाए। लेकिन आज तक एसईसी निर्वाचन विभाग की ताजा सूची लेता आया है। लेकिन राजस्थान के निकाय और पंचायत चुनावों में एसईसी ने पुरानी लिस्ट उठाई। जबकि एसआईआर में इस सूची में लगभग 1 लाख 80 हजार मृत हैं। उन्होंने कहा कि हमने जब एसईसी से इस बारे में जवाब मांगा तो उन्होंने कहा कि हमारी चुनाव प्रक्रिया बहुत पहले से शुरू हो गई थी। उन्होंने कहा कि ऑडिट प्रक्रिया भी एसईसी से मांगी है लेकिन वह भी इन्होंने नहीं माना। यह बहुत फंडामेंटल इश्यू है। हम आरटीआई से भी जानकारी लेने की कोशिश कर रहे हें।
पुरानी सूची को बताया आधार
राज्य निर्वाचन आयोग की रिपोर्ट में बताया कि स्थानीय निकाय चुनाव की तैयारियां काफी पहले शुरू हो गई थीं। इसी वजह से निर्वाचन आयोग की SIR से पहले वाली मतदाता सूची को आधार सूची के रूप में इस्तेमाल किया गया। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवीन महाजन ने भी कहा कि राज्य निर्वाचन आयोग ने SIR से पहले की सूची पर भरोसा किया था। उन्होंने यह भी कहा कि राजस्थान में SIR की अंतिम सूची को लेकर कोई आपत्ति नहीं उठाई गई।
इसे लेकर निखिल डे का कहना है कि मतदाता सूचियां लगातार अपडेट होती रहती हैं, ऐसे में राज्य निर्वाचन आयोग SIR के बाद जारी अंतिम सूची का इस्तेमाल कर सकता था। उन्होंने बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) की भूमिका पर भी सवाल उठाया। उनका तर्क है कि एक ही BLO एक सूची में किसी मतदाता को मृत दर्ज करता है, जबकि दूसरी सूची में उसका नाम बरकरार रहता है। ऐसे में दोनों सूचियों के बीच इतना बड़ा अंतर कैसे बना रहा, इसकी जांच होनी चाहिए।