फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

राजस्थान: पढ़ाई कराएं या बाल विवाह रोकें? प्रधानाचार्यों को नई जिम्मेदारी पर शिक्षक नाराज

Tue, 20 Oct 2026 08:31 AM IST
Sourabh Bhatt न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर

सार

राजस्थान में सरकारी स्कूलों के प्रधानाचार्यों को बाल विवाह रोकने के लिए बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी की जिम्मेदारी दी गई है। उन्हें अपने क्षेत्र में बाल विवाह रोकने, सबूत जुटाने और जागरूकता फैलाने का काम करना होगा। शिक्षक संगठनों ने अतिरिक्त जिम्मेदारी से पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका जताई है।

विज्ञापन
बाल विवाह
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

राजस्थान में सरकारी स्कूलों के प्रधानाचार्यों की जिम्मेदारी अब पढ़ाई और स्कूल प्रशासन तक सीमित नहीं रहेगी। उन्हें अपने क्षेत्र में बाल विवाह रोकने के लिए भी कानूनी जिम्मेदारी निभानी होगी। इसके तहत वे बाल विवाह की सूचना मिलने पर हस्तक्षेप करेंगे, अभियोजन के लिए सबूत जुटाएंगे, परिवारों को समझाएंगे और लोगों को बाल विवाह के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करेंगे। इस व्यवस्था को लेकर शिक्षा विभाग ने निर्देश जारी किए हैं।

माध्यमिक शिक्षा निदेशक ललित कुमार की ओर से मंगलवार को जारी आदेश में सरकारी स्कूलों के प्रधानाचार्यों को बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी (सीएमपीओ) के रूप में तय जिम्मेदारियां निभाने के निर्देश दिए गए हैं। यह व्यवस्था राज्य सरकार की अधिसूचना के आधार पर लागू की जा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूल के प्रधानाचार्य का कार्यक्षेत्र संबंधित ग्राम पंचायत होगा, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह जिम्मेदारी उस नगर निकाय के संबंधित वार्ड तक रहेगी।

स्कूल प्रधानाचार्यों के अलावा ग्राम विकास अधिकारियों और पटवारियों को भी अपने-अपने कार्यक्षेत्र में बाल विवाह रोकने की जिम्मेदारी दी गई है। इस तरह शिक्षा, राजस्व और पंचायती राज विभाग के स्थानीय अधिकारियों को बाल विवाह की रोकथाम के लिए साथ काम करना होगा।

विज्ञापन


यह भी पढें- राजस्थान: अजमेर में पुलिस जवान ने सर्विस राइफल से खुद को मारी गोली, चुनाव ड्यूटी के दौरान हुई घटना से हड़कंप

बाल विवाह रोकने के लिए क्या करना होगा?

बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी के रूप में प्रधानाचार्यों को कई कानूनी जिम्मेदारियां निभानी होंगी। इनमें बाल विवाह रोकने के लिए उचित कदम उठाना, ऐसे विवाह को बढ़ावा देने या उसमें मदद करने वालों के खिलाफ अभियोजन के लिए सबूत जुटाना और परिवारों व समुदायों को समझाना शामिल है। उन्हें बाल विवाह के दुष्परिणामों के बारे में जागरूकता फैलाने के साथ सरकार के निर्देशानुसार रिपोर्ट और आंकड़े भी प्रस्तुत करने होंगे।

बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी की जिम्मेदारियां बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 की धारा 16 में निर्धारित हैं। राज्य सरकार ने 24 अप्रैल 2026 को जारी अधिसूचना को 14 मई को राजपत्र में प्रकाशित किया था। इसमें तय स्कूल प्रधानाचार्यों के साथ राजस्व और पंचायती राज विभाग के अधिकारियों को भी सीएमपीओ के रूप में नामित किया गया। शिक्षा विभाग का 13 अक्टूबर का आदेश स्कूलों में इस व्यवस्था को लागू करने के निर्देश देता है।

जांच से जुड़ी शक्तियां भी, लेकिन सीमाएं तय

अधिसूचना में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 के तहत संज्ञेय अपराधों से संबंधित कुछ जांच शक्तियां भी निर्धारित शर्तों और सीमाओं के अधीन दी गई हैं। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि स्कूल प्रधानाचार्यों को पुलिस जैसी असीमित शक्तियां मिल गई हैं। बाल विवाह रोकने की सामान्य जिम्मेदारी और अधिसूचना के तहत दी गई विशिष्ट जांच शक्तियों के दायरे अलग-अलग हैं।

शिक्षक संगठनों ने जताई आपत्ति

प्रधानाचार्यों को अतिरिक्त कानूनी जिम्मेदारी सौंपने पर शिक्षक संगठनों ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि शिक्षकों और स्कूल प्रमुखों पर पहले से ही पढ़ाई के अलावा कई विभागीय और प्रशासनिक काम हैं। नई जिम्मेदारी से शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं।

अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (राजस्थान स्कूल शिक्षा) के प्रदेश मंत्री रवि आचार्य ने इस फैसले का विरोध किया। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को पढ़ाने के अलावा पहले से करीब 50 तरह की जिम्मेदारियां सौंपी जा चुकी हैं। ऐसे में एक और कानूनी जिम्मेदारी देने से उनका गैर-शैक्षणिक काम बढ़ेगा और स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका है।

नई व्यवस्था के तहत स्कूल प्रधानाचार्य अपने क्षेत्र में बाल विवाह की रोकथाम के लिए स्थानीय स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। किसी संभावित बाल विवाह की सूचना मिलने पर प्रभावी कार्रवाई के लिए उन्हें पुलिस और जिला प्रशासन के साथ समन्वय भी करना होगा।

विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें