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जयपुर: दीपावली के लिए ऑनलाइन शॉपिंग करने से पहले पढ़लें ये खबर...ऑफर के चक्कर में खाली हो सकता है बैंक खाता

Sat, 17 Oct 2026 08:12 AM IST
Sourabh Bhatt न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर

सार

दिवाली की ऑनलाइन सेल में फर्जी डिस्काउंट लिंक, नकली वेबसाइट और एआई शॉपिंग स्कैम से बचने के लिए राजस्थान पुलिस ने एडवाइजरी जारी की है। ठगी होने पर 1930 पर कॉल करें।

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ऑनलाइन शॉपिंग में ऐसे हो सकती है ठगी - फोटो : Amar Ujala AI
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विस्तार
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दिवाली की शॉपिंग में भारी डिस्काउंट और फ्लैश डील देखकर खरीदारी करने जा रहे हैं, तो जरा ठहरिए। जिस ऑफर को आप हजारों रुपये बचाने का मौका समझ रहे हैं, वह साइबर ठगों का जाल भी हो सकता है। फ्लिपकार्ट और अमेजन जैसी ई-कॉमर्स साइट्स के नाम पर फर्जी लिंक, नकली वेबसाइट और लुभावने मैसेज के जरिए लोगों को निशाना बनाया जा सकता है। त्योहारों की ऑनलाइन सेल के दौरान बढ़ते साइबर खतरे को देखते हुए राजस्थान पुलिस ने एडवाइजरी जारी कर लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।

राजस्थान पुलिस के साइबर क्राइम विंग आर-4-सी ने ऑनलाइन खरीदारी के दौरान होने वाली संभावित धोखाधड़ी से बचने के लिए सुरक्षा उपाय बताए हैं। महानिदेशक पुलिस राजीव कुमार शर्मा के निर्देश पर जारी एडवाइजरी में अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस साइबर क्राइम वीके सिंह ने बताया कि त्योहारों के दौरान ऑनलाइन खरीदारी बढ़ने के साथ साइबर अपराधी भी सक्रिय हो जाते हैं। वे बड़ी छूट, फ्लैश डील, गिफ्ट कार्ड और ऑर्डर अपडेट के बहाने लोगों की निजी और बैंकिंग जानकारी चुराने की कोशिश करते हैं।

एआई से तैयार हो रहे असली जैसे फर्जी ऑफर

साइबर ठगी का तरीका भी बदल रहा है। अब अपराधी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से असली जैसी दिखने वाली शॉपिंग स्क्रीन और डिस्काउंट लिंक तैयार कर सकते हैं। ग्राहक को वेबसाइट या ऑफर वास्तविक लगता है और वह जल्दबाजी में लिंक खोलकर अपनी जानकारी दर्ज कर देता है। इसी तरह फर्जी एसएमएस और ईमेल में ऑर्डर अपडेट, गिफ्ट कार्ड या भारी छूट का लालच देकर लॉगिन डिटेल और भुगतान संबंधी जानकारी हासिल करने की कोशिश की जाती है।

नकली वेबसाइट से भी रहें सावधान: ठग बड़ी ई-कॉमर्स कंपनियों की वेबसाइट जैसी दिखने वाली साइट बना सकते हैं। ग्राहक अनजाने में ऐसी साइट पर कार्ड या यूपीआई की जानकारी दर्ज कर दे, तो उसका दुरुपयोग होने का खतरा रहता है। इसलिए किसी भी प्रमोशनल लिंक पर क्लिक करने से पहले उसकी सत्यता जांचना जरूरी है।

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खरीदारी के दौरान चुपके से जुड़ सकते हैं अतिरिक्त चार्ज

राजस्थान पुलिस ने ऑनलाइन खरीदारी में छिपे शुल्क और अनचाहे प्रोडक्ट जोड़ने के तरीकों को लेकर भी सावधान किया है। कुछ वेबसाइट या ऐप पर चेकआउट के समय अतिरिक्त फीस, इंश्योरेंस या सब्सक्रिप्शन कार्ट में जुड़ा हो सकता है। ग्राहक जल्दबाजी में भुगतान कर देता है और बाद में उसे अतिरिक्त रकम का पता चलता है। ऐसे में पेमेंट करने से पहले ऑर्डर की पूरी समरी ध्यान से देखना जरूरी है।

ऑनलाइन शॉपिंग करते समय इन बातों का रखें ध्यान

- लिंक के बजाय आधिकारिक ऐप खोलें: वेबसाइट का पता खुद टाइप करें या वेरिफाइड ऐप से खरीदारी करें। अनजान मैसेज में आए ऑफर लिंक पर सीधे क्लिक न करें।

- फर्जी मैसेज से बचें: लॉटरी, गिफ्ट कार्ड या त्योहार पर बड़ी जीत का दावा करने वाले अनजान एसएमएस और व्हाट्सऐप संदेशों पर भरोसा न करें।

- पेमेंट से पहले कार्ट जांचें: भुगतान करने से पहले कुल कीमत, डिलीवरी शुल्क, इंश्योरेंस और सब्सक्रिप्शन सहित सभी मदों को ध्यान से देखें।

- खाते की सुरक्षा मजबूत करें: हर खाते के लिए अलग और मजबूत पासवर्ड रखें। टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन या बायोमेट्रिक लॉगिन उपलब्ध हो तो उसे चालू करें।

- कार्ड की जानकारी सेव करने से बचें: रिटेल प्लेटफॉर्म पर कार्ड नंबर और सीवीवी सेव करने के बजाय सुरक्षित भुगतान विकल्पों का इस्तेमाल करें। यूपीआई से भुगतान करते समय भी प्राप्तकर्ता और भुगतान अनुरोध की जांच करें।

ठगी हो जाए तो तुरंत करें शिकायत

अगर ऑनलाइन खरीदारी के दौरान ठगी हो जाए या साइबर ठग पैसे ऐंठने की कोशिश करें, तो देरी न करें। राजस्थान पुलिस ने लोगों से निकटतम पुलिस थाने या साइबर पुलिस थाने में सूचना देने की अपील की है। साइबर अपराध की शिकायत https://cybercrime.gov.in पर की जा सकती है। आर्थिक साइबर ठगी की स्थिति में तुरंत 1930 पर कॉल करें। इसके अलावा साइबर हेल्पडेस्क नंबर 9256001930 और 9257510100 पर भी सूचना दी जा सकती है।

 

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