राजस्थान में पालनहार योजना के लाभार्थी लगभग ढाई लाख बच्चों के 40 करोड़ रुपये से अधिक के भुगतान सरकार में अटके हुए हैं। विधानसभा में शुक्रवार को विधायक मनीष यादव के तारांकित सवाल के जवाब में सामाजिक न्याय विधाभ की ओर से यह जवाब दिया गया। पालनहार योजना को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में सरकार ने बताया कि इस योजना में कुल छह लाख 15 हजार से ज्यादा बच्चे लाभांवित हो रहे हैं। लेकिन जुलाई से लेकर दिसंबर तक इनमें से लाखों बच्चों को भुगतान नहीं किया जा सका है।
इसमें जुलाई में 2807 बच्चों के एक करोड़ 17 लाख, सितंबर में 20735 बच्चों के तीन करोड़ आठ लाख, अक्तूबर में 104515 बच्चों के 15 करोड़ 47 लाख, नवंबर में 112828 बच्चों के 16 करोड़ 78 लाख तथा दिसंबर में 24061 बच्चों के तीन करोड़ 65 लाख रुपये के भुगतान लंबित चल रहे हैं।
क्या है पालनहार योजना
राजस्थान सरकार की पालनहार योजना, राज्य के अनाथ बच्चों और जिनके माता-पिता की मृत्यु हो चुकी है, उनके पालन-पोषण और शिक्षा के लिए वित्तीय सहायता देती है। इस योजना के तहत, बच्चों की देखभाल और पालन-पोषण की ज़िम्मेदारी परिवार के किसी निकट रिश्तेदार या परिचित को दी जाती है। इस रिश्तेदार को संरक्षक नियुक्त किया जाता है।
इस योजना के तहत मिलने वाली सहायता
पांच साल तक के बच्चों को हर महीने 500 रुपये, स्कूल में दाखिले के बाद 18 साल तक के बच्चों को हर महीने 1,000 रुपये, वस्त्र, जूते, स्वेटर वगैरह के लिए हर साल 2,000 रुपये।
इस योजना के लिए पात्रता
पालनहार परिवार की वार्षिक आय 1.20 लाख रुपये से ज़्यादा नहीं होनी चाहिए। दो साल की उम्र में बच्चे को आंगनबाड़ी में भेजना ज़रूरी है। छह साल की उम्र में बच्चे को स्कूल भेजना ज़रूरी है।
योजना के लिए ज़रूरी दस्तावेज़
भामाशाह कार्ड, बच्चों का अध्ययन प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, मूल निवास प्रमाण पत्र. आवेदन करने के लिए, ईमित्र कियोस्क लॉगिन आईडी और पासवर्ड डालकर पालनहार योजना पोर्टल पर आवेदन किया जा सकता है।