फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Rajasthan News: सात साल तक बिना वैध लाइसेंस के प्रैक्टिस करते रहे डाक्साब, आरएमसी में नियुक्ति पर उठे सवाल

Fri, 28 Feb 2025 01:36 PM IST
प्रिया वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर

सार

राजस्थान मेडिकल काउंसिल के कार्यवाहक रजिस्ट्रार की नियुक्ति से नया विवाद खड़ा हो गया है। दरअसल नवनियुक्त कार्यवाहक रजिस्ट्रार ने कई वर्षों तक बिना लाइसेंस के मरीजों का इलाज किया है और बिना वैध लाइसेंस के प्रैक्टिस करना नेशनल मेडिकल कमीशन के नियमों के खिलाफ है और ऐसे डॉक्टरों को झोलाछाप डॉक्टर की श्रेणी में रखा जाता है।
विज्ञापन
राजस्थान - फोटो : सोशल मीडिया
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

प्रदेश के चिकित्सा विभाग में इन दिनों कुछ विवादास्पद नियुक्तियों को लेकर हलचल मची हुई है। पिछले साल राजस्थान यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ एंड साइंसेज में कार्यवाहक वीसी के रूप में डॉ. धनंजय अग्रवाल की नियुक्ति पर उनकी अयोग्यता को लेकर सवाल उठाए गए थे। अब राजस्थान मेडिकल काउंसिल के कार्यवाहक रजिस्ट्रार डॉ. गिरधर गोयल की नियुक्ति ने एक नया विवाद खड़ा कर दिया है।

विज्ञापन


डॉ. गोयल को पिछले साल अक्टूबर में RMC का कार्यवाहक रजिस्ट्रार नियुक्त किया गया था। हालांकि वे खुद एक गंभीर विवाद से जुड़े हैं। डॉ. गोयल ने 7 साल 9 महीने तक बिना वैध लाइसेंस के एसएमएस हॉस्पिटल और अपने निजी क्लिनिक पर अवैध तरीके से प्रैक्टिस की है। उनके खुद के रजिस्ट्रेशन की वैधता 27 अप्रैल 2016 को समाप्त हो गई थी, जिसे उन्होंने फरवरी 2024 में रिन्यू कराया। विशेषज्ञों के अनुसार बिना वैध लाइसेंस के प्रैक्टिस करना नेशनल मेडिकल कमीशन के नियमों के खिलाफ है और ऐसे डॉक्टरों को झोलाछाप डॉक्टर की श्रेणी में रखा जाता है।

डॉ. गोयल ने अपनी नियुक्ति के बाद RMC में नए और पुराने डॉक्टरों के रजिस्ट्रेशन व रिन्युअल का कार्य संभाला है, जबकि उन्होंने स्वयं कई वर्षों तक बिना लाइसेंस के मरीजों का इलाज किया। इस बीच गोयल के लाइसेंस को रिन्युअल करने के लिए 1000 रुपए की पेनल्टी लगाई गई और फिर उनका रजिस्ट्रेशन 2026 तक के लिए रिन्यू किया गया।
विज्ञापन


पहले भी इसी तरह का एक और मामला सामने आया था, जब डॉ. धनंजय अग्रवाल को राजस्थान यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ एंड साइंसेज के कार्यवाहक वीसी के रूप में नियुक्त किया गया था। हालांकि राज्यपाल द्वारा गठित सिलेक्शन कमेटी ने जब वीसी के इंटरव्यू के लिए आवेदन मांगे तो डॉ. अग्रवाल को इंटरव्यू के लिए भी योग्य नहीं माना गया। इसके बाद सवाल उठता है कि सरकार ने डॉ. अग्रवाल को पिछले 8 महीने तक कार्यवाहक वीसी क्यों बनाए रखा, जबकि नियमों के अनुसार किसी विश्वविद्यालय में कार्यवाहक वीसी की नियुक्ति अधिकतम 5 से 6 महीने तक हो सकती है।



बहरहाल इस मामले को लेकर आरएमसी के पूर्व चेयरमैन डॉ के.के. शर्मा का कहना है कि कोई भी एलोपैथिक चिकित्सक जिसके पास ग्रजुऐशन, पोस्ट ग्रजुऐशन की सुपर स्पेशलाइजेशन की डिग्री है, उसे राजस्थान मेडिकल काउंसिल में रजिस्ट्रेशन करवाना और लाइसेंस रिन्यू करवाना अतिआवश्यक है अन्यथा यह चिकित्सक झोलाझाप चिकित्सक समझे जाते हैं।
विज्ञापन



मामले को लेकर डॉ. गिरधर गोयल का भी बयान सामने आया है। उनका कहना है कि मेरे लाइसेंस का रिन्यूअल वर्तमान में कंप्लीट है बीच में कुछ समय रिन्यू करवाना भूल गया था अभी भी कई डॉक्टर्स रिन्यूअल करवाना भूल जाते हैं।

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें