बीजेपी में अपने अच्छे दिनों का इंतजार कर रहे राजेंद्र राठौड़ के लिए शायद पंचायत चुनाव में भी कोई अच्छी खबर नहीं आ रही। पार्टी के निर्देश के बाद आरसीए चुनावों से अपना नाम वापस लेने वाले राजेंद्र राठौड़ के बेटे पराक्रम राठौड़ ने बुधवार को चूरू जिला परिषद के लिए चूरू जिला परिषद के वार्ड संख्या 39 से चुनाव मैदान में उतर गए। लेकिन पराक्रम का टिकट पार्टी ने होल्ड पर कर दिया। हालांकि उनकी पत्नी कनिका सिंह ने भी चूरू के वार्ड संख्या 23 से बीजेपी के सिंबल पर पर्चा दाखिल किया है। कनिका सिंह मूल रूप से चूरू जिले के सरदारशहर क्षेत्र के हरपालसर गांव की रहने वाली हैं। वे हाल ही में राजस्थान फुटबॉल क्लब की स्थापना को लेकर भी चर्चा में रही।
वहीं बीजेपी ने अब पराक्रम अपना प्रत्याशी नहीं बनाया है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि आरसीए की तरह यहां भी पराक्रम को नाम वापस लेने के लिए कहा गया है। राठौड़ खेमें में भारी निराशा नजर आ रही है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या बीजेपी बार-बार अपने वरिष्ठ नेताओं को साइडलाइन कर रही है।
गौरतलब है कि पराक्रम ने चूरू जिला परिषद के वार्ड संख्या 39 से भाजपा के टिकट पर नामांकन दाखिल किया है। वहीं, उनकी पत्नी कनिका सिंह ने वार्ड संख्या 23 से पर्चा भरा है। लेकिन दोनों को ही पार्टी सिंबल नहीं मिला। कल नामांकन का अंतिम दिन है। इसी बीच एक बैठक में राजेंद्र राठौड़ की नाराजगी सामने आने की चर्चा है। बताया जा रहा है कि बैठक में राठौड़ ने बेटे के टिकट को लेकर सवाल उठाए। बताया जा रहा है कि राठौड़ ने यहां तक कहा कि संगठन को उनसे क्या दिक्कत है।
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आरसीए की तरह नाम वापसी की चर्चा
पराक्रम सिंह राठौड़ इससे पहले राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (आरसीए) के अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर चर्चा में आए थे। सितंबर 2026 में उन्होंने अध्यक्ष पद के लिए अपना नामांकन वापस ले लिया था। इस नाम वापसी को लेकर पराक्रम ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि वे चुनाव लड़ना चाहते थे और उनके पास 32 जिला संघों का समर्थन (बहुमत) भी था, लेकिन पार्टी के खिलाफ जाना उनके संस्कारों में नहीं है और उन्होंने अपने पिता राजेंद्र राठौड़ के कहने पर तथा पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के दिशा-निर्देश पर अपना नामांकन वापस लिया।
‘मैं पार्टी लाइन क्रॉस करने वाला आदमी नहीं हूं’
मामले को लेकर अमर उजाला ने राजेंद्र राठौड़ से बात की। राठौड़ ने सिर्फ इतना कहा कि मैं कभी पार्टी लाइन क्रॉस करने वाला आदमी नहीं रहा। इसके बाद राठौड़ जयपुर से चूरू के लिए रवाना भी हो गए।