लगता है राजस्थान की ब्यूरोक्रेसी में कुछ अफसर अपनी मनमानी पर उतर आए हैं। यहां तक कि मुख्य सचिव की बैठकों का भी अघोषित बहिष्कार किया जा रहा है। हर पखवाड़े होने वाली सीनियर लेवल ऑफिसर्स की मीटिंग (SOM) में भी ये IAS दंपति शामिल नहीं हुए। बड़ा सवाल यह है कि अगर सीनियर स्तर के अफसर इस तरह से मनमानी करेंगे तो आगे क्या मैसेज जाएगा?
मुख्य सचिव सुधांश पंत की मीटिंग्स में शामिल नहीं होकर खुला चेलैंज देने का यह मामला सचिवालय में पदस्थ सीनियर स्तर के आईएएस दंपति से जुड़ा है। हर पखवाड़े होने वाली सीनियर ऑफिसर्स मीटिंग में पिछली 2 बार से ये दंपत्ति शामिल नहीं हुए। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक पिछले दिनों मुख्य सचिव के चैंबर में इस मुद्दे को लेकर काफी कहा-सुनी भी हुई और मामला उच्च स्तर तक जा पहुंचा है।
हालांकि मीटिंग में शामिल नहीं होने के पीछे स्वास्थ्य संबंधी कारण बताया जा रहा है लेकिन देखा जाए तो दोनों आईएएस सचिवालय भी आ रहे हैं और अपने मातहतों की लंबी-लंबी मीटिंग्स भी ले रहे हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या सीएस की बैठकों का जान-बूझकर बहिष्कार किया जा रहा है। सचिवालय में विभागों के कामों की मॉनिटरिंग के लिए मुख्य सचिव के स्तर पर हर पखवाड़े यह सीनियर लेवल ऑफिसर्स मीटिंग्स बुलाई जाती है ताकि कहीं किसी विभाग में काम की गति धीमी है या कोई समस्या है तो उसका मुख्य सचिव के स्तर पर ही समाधान कर लिया जाए।
कई बार इन मीटिंग्स में विभागों के बीच कॉर्डिनेशन से जुड़े इश्यूज भी आते हैं। ऐसे में जब सीनियर ऑफिसर्स के स्तर पर ही ब्यूरोक्रेसी के सबसे बड़े अफसर का सम्मान नहीं किया जाएगा तो नीचे क्या मैसेज जाएगा।