“ये कोई साधारण कछुआ नहीं है... इसके 20 नाखून हैं और ये पीले रंग का है... अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत करोड़ों में है!” कुछ इसी जादूई कहानी से शुरू होती है नकली करोड़पति बनाने की साजिश, जिसने आम लोगों को लखपति से भिखारी बना दिया। राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले के रवांजना डूंगर थाना क्षेत्र में पुलिस ने रामनिवास मोग्या नामक एक ऐसे शातिर ठग को गिरफ्तार किया है, जो खुद को एक करोड़पति बनाने वाले गुरु के रूप में पेश करता है, पर असल में ये ठगों की दुनिया का 'नटवरलाल' है।
करोड़ों का सपना, लाखों की लूट
29 अगस्त 2025 को पप्पूलाल माली, निवासी कुश्तला ने पुलिस में रिपोर्ट दी कि कुछ लोग उसे 1 करोड़ में बिकने वाला कछुआ देने का वादा करके 6.5 लाख रुपये ठग ले गए। रिपोर्ट में बताया कि बताया कि आरोपी रामनिवास मोग्या निवासी शम्भूनगर, थाना केकड़ी, जिला अजमेर व उसके साथी रामराज मोग्या और तथाकथित “डॉक्टर साहब” मनीष शर्मा ने उसे बहला-फुसलाकर यह कहकर 6.50 लाख रुपए ठग लिए कि वे एक कछुए को 1 करोड़ रुपए में बिकवा देंगे। पप्पूलाल ने बताया कि ठगों ने उसे यह विश्वास दिलाया कि "कछुआ इतना दुर्लभ है कि इंटरनेशनल बायर्स इसके लिए लाइन में हैं" ऐसा बोलकर उसे पीले रंग का इंजेक्शन लगाया गया कछुआ सौंपा गया, जो कुछ घंटों में ही मर गया। महंगा दिखाने के लिए कछुओं को खास इंजेक्शन से पीला किया जाता था ताकि वे दुर्लभ प्रजाति के लगें।
यह भी पढें-
Rajasthan News: PG मेडिकल छात्रों के लिए क्लिनिकल बॉन्ड राशि में 5 गुना तक बढ़ोतरी, कोर्स वाइज नई दरें लागू
महंगी गाड़ी और नकली नोटों से भरे कार्टन दिखाते थे
ठग फर्जी डॉक्टर और तस्कर बनकर महंगी गाड़ियों में आते और करोड़ों के सौदे का नाटक करते थे। उनका 5-6 लोगों का गिरोह है, जो अलग-अलग गांवों व शहरों में जाकर 18 या 20 नाखून वाले एवं पीले रंग के कछुओं के नाम पर लोगों से ठगी करता है। ठगी के दौरान नकली नोटों से भरे कार्टन दिखाए जाते, जिनके ऊपर असली नोट और नीचे कागज होता। "डील क्लोजिंग" के नाम पर एडवांस रकम वसूली जाती और फिर आरोपी गायब हो जाते।
पुलिसिया जांच और गिरोह का खुलासा
थानाधिकारी हरिमन मीणा के अनुसार जांच में पता चला कि यह कोई अकेला ठग नहीं, बल्कि 5-6 लोगों का संगठित गिरोह है। ये लोग राजस्थान के अलावा अन्य राज्यों में भी लोगों को कछुए का करोड़पति सपना बेचते थे। गिरफ्तार रामनिवास मोग्या से पूछताछ जारी है और पुलिस अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी है। गौरतलब है कि भारत में कछुए की अधिकांश प्रजातियां वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के अंतर्गत संरक्षित हैं और इनका व्यापार गैरकानूनी है।