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Phone Tapping: पायलट ने रखी श्वेत पत्र की मांग, बोले- खुद के मंत्री का आरोप साधारण बात नहीं; सच आना चाहिए बाहर

Wed, 12 Feb 2025 04:45 PM IST
अर्पित याज्ञनिक न्यूज डेस्क, अमर उजाला, राजस्थान

सार

कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने सरकार से सदन में स्पष्ट जवाब देने और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। साथ ही, उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार को व्हाइट पेपर जारी कर जनता को सच्चाई बतानी चाहिए।
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सचिन पायलट। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने फोन टैपिंग के मुद्दे पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि जब सरकार का एक मंत्री खुद यह आरोप लगा रहा है कि उसका फोन टैप हो रहा है, तो यह कोई मामूली बात नहीं है। उन्होंने मांग करते हुए कहा कि सरकार को इस पर सदन में स्पष्ट जवाब देना चाहिए और मामले की निष्पक्ष जांच करानी चाहिए।

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सचिन पायलट ने कहा कि अगर कोई आम नागरिक यह आरोप लगाता, तो एक बार समझा जा सकता था, लेकिन जब सरकार का ही एक मंत्री यह कहता है कि उसका फोन टैप हो रहा है और उसके पास प्रमाण हैं, तो सरकार को इस पर जवाब देना चाहिए। यह कोई निजी मामला नहीं है, बल्कि सरकार की पारदर्शिता और जनता के अधिकारों से जुड़ा गंभीर मुद्दा है।"



सरकार को जारी करना चाहिए व्हाइट पेपर
पायलट ने कहा कि यह मामला सिर्फ पार्टी स्तर की कार्रवाई से नहीं सुलझेगा। सरकार को चाहिए कि वह इस पर सफाई दे और एक व्हाइट पेपर जारी करे, ताकि जनता को सच्चाई पता चल सके। उन्होंने कहा कि "सरकार का कोई भी मंत्री, जब सार्वजनिक रूप से यह आरोप लगाता है, तो इसका मतलब है कि सरकार खुद पर सवाल उठा रही है।"
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पिछली सरकारों की भी हो जांच
सचिन पायलट ने फोन टैपिंग की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि "अगर किसी भी अधिकारी या अफसर ने किसी भी सरकार के दबाव में आकर फोन टैपिंग की है, तो इसकी जांच होनी चाहिए और दोषियों को सजा मिलनी चाहिए। यह मामला किसी भी राजनीतिक दल से जुड़ा नहीं बल्कि नागरिकों के मौलिक अधिकारों से जुड़ा है।"

भाजपा के अंदरूनी मामले पर भी साधा निशाना
पायलट ने कहा कि यह भाजपा का अंदरूनी मामला हो सकता है, लेकिन जब कोई मंत्री खुद इस तरह के आरोप लगाता है, तो सरकार को चुप नहीं रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि "सरकार का मंत्री सरकार का ही अंग होता है, ऐसे में यह बयान कोई साधारण बात नहीं है।"

गौरतलब है कि इस मामले को लेकर विधानसभा सत्र में भी विपक्ष ने सवाल उठाए, लेकिन सरकार की तरफ से कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया। अब देखना यह होगा कि सरकार इस पर क्या रुख अपनाती है।

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