छात्र नेताओं को जबरदस्ती उठाती पुलिस।
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राजस्थान में छात्रसंघ चुनावों को लेकर सियासत और गरमा गई है। छात्रसंघ चुनावों की मांग को लेकर पिछले चार दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे शुभम रेवाड़ को पुलिस जबरदस्ती उठाकर ले गई और उनका अनशन तुड़वा दिया। इसके बाद शुभम और उनके समर्थकों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।
छात्र नेता शुभम रेवाड़ ने कहा कि राजस्थान यूनिवर्सिटी प्रशासन ने आम छात्रों से एडमिशन फीस के साथ चुनावी शुल्क भी वसूला था। इसके बाद से ही छात्र पिछले लंबे वक्त से यूनिवर्सिटी चुनाव की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। यूनिवर्सिटी प्रशासन हमारी जायज मांग को सुनने की जगह सरकार को चुनाव नहीं कराने की सलाह दे रहा है। शुभम ने कहा कि मैं यहां रुकने वाला नहीं हूं, जब तक राजस्थान की पर्ची सरकार राजस्थान के लाखों युवाओं की आशा के अनुरूप छात्र संघ चुनाव फिर से शुरू नहीं करेगी, मेरा आंदोलन जारी रहेगा। आम छात्रों के साथ मिलकर एक बार फिर पुरजोर ढंग से हम अपनी वाजिब मांग को रखेंगे।
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शुभम बोले कि छात्र संघ चुनावों की मांग को लेकर छात्र न सिर्फ यूनिवर्सिटी बल्कि सड़कों पर उतर कर भी अपना विरोध दर्ज करवा चुके हैं। यूनिवर्सिटी के कई पूर्व अध्यक्ष, सांसद और विधायक भी छात्रसंघ चुनाव बहाल करवाने का समर्थन कर चुके हैं।
इधर, पूर्व सीएम अशोक गहलोतने भी इस घटना पर अपना बयान जारी कर दिया। उन्होंने कहा कि छात्रसंघ चुनाव बहाल करवाने की मांग को लेकर राजस्थान विश्वविद्यालय में अनशन कर रहे छात्र नेताओं को पुलिस द्वारा जबरन बलपूर्वक वहां से उठाना निंदनीय है। लोकतंत्र में धरना, प्रदर्शन, अनशन अपनी बात सरकार के सामने रखने के लोकतांत्रिक तरीके हैं। राज्य सरकार को बल प्रयोग की बजाय इन छात्रों से बात कर समाधान निकालना चाहिए।