जयपुर में सचिवालय के पीछे योजना भवन की आलमारी से निकले करोड़ों के भ्रष्टाचार के धन ने सरकार की जमकर किरकिरी करवाई है। आरोपी DOIT का जॉइंट डायरेक्टर वेदप्रकाश यादव तो पकड़ा गया है, लेकिन ऊपर तक का भ्रष्टाचार दब गया। मामले में कई और भ्रष्ट सरकारी अधिकारी-कर्मचारियों को नापने की नीयत नज़र नहीं आई।
मामला कुछ शांत पड़ने के बाद अब मुख्य सचिव उषा शर्मा ने प्रशासनिक सुधार विभाग से सर्क्युलर जारी कर सभी सरकारी कार्यालयों में काम कर रहे अधिकारी कर्मचारियों की एक ही स्थान पर सामान्य तौर पर पोस्टिंग तीन साल से ज्यादा नहीं होने और विशेष मामलों में पांच साल से ज्यादा नहीं रखने के आदेश जारी किए हैं। मुख्य सचिव उषा शर्मा ने राज्य में सुशासन की स्थापना के लिए राजकार्य फ़ास्ट स्पीड से करने और शासन तंत्र में सभी स्तरों पर पारदर्शिता, जवाबदेहिता और उत्तरदायित्व सुनिश्चित करने की बात कहते हुए अधिकारी कर्मचारियों के ट्रांसफर-पोस्टिंग की गाइडलाइन जारी की है।
सर्कुलर में मुख्य सचिव ने ये आदेश निकाले...
मुख्य सचिव ने कहा है कि अक्सर यह देखने में आया है कि शासन सचिवालय और विभिन्न विभागों के निदेशालयों, आयुक्तालयों और अधीनस्थ कार्यालयों में अधिकारी, कर्मचारी लोग लंबे समय तक एक ही सेक्शन और कार्यालय में पोस्टेड रहते हैं, जिससे राजकार्य की पारदर्शिता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। कार्यप्रणाली की निष्ठा और विश्वसनीयता के संदेहास्पद होने की स्थिति पैदा हो जाती है। इसलिए राजकार्य में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए में निर्देशित किया जाता है कि समस्त विभागों और कार्यालयों में कार्यरत अधिकारियों-कर्मचारियों की एक ही स्थान पर पदस्थापन अवधि सामान्य तौर पर तीन साल और स्पेशल किस्म के मामलों आवश्यकता के मुताबिक पांच साल से अधिक नहीं हो। समस्त अतिरिक्त मुख्य सचिव, प्रमुख शासन सचिव, शासन सचिवों से अपेक्षा की जाती है कि वे इन निर्देशों की पालना कराया जाना सुनिश्चित करेंगे।
आदेश की कॉपी इन्हें भी भेजी गई...
सीएस उषा शर्मा ने प्रशासनिक सुधार विभाग के इस सर्कुलर की कॉपी मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव, सभी मंत्रियों के विशिष्ट सहायक और निजी सचिव, मुख्य सचिव के जॉइंट सेक्रेटरी, डीजीपी, सभी अतिरिक्त मुख्य सचिव, प्रमुख शासन सचिव, शासन सचिव, सभी सम्भागीय आयुक्त, जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, निगम, बोर्ड, आयोग के सभी विभागाध्यक्ष को भेजी है।