प्रदेश के सरकारी स्कूलों के जर्जर भवनों और कक्षाओं की बदहाल स्थिति पर राजस्थान हाईकोर्ट ने एक बार फिर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने कहा कि जुलाई से अब तक केवल चार स्कूलों में ही मरम्मत का काम शुरू हुआ है, जबकि मार्च में बजट लैप्स होने वाला है। इसके बावजूद सरकार अभी तक सिर्फ टेंडर जारी करने में ही लगी हुई है।
यह टिप्पणी जस्टिस महेंद्र गोयल और जस्टिस अशोक कुमार जैन की खंडपीठ ने झालावाड़ स्कूल हादसे के बाद स्वप्रेरणा से दर्ज मामले की सुनवाई के दौरान की।
सरकार की प्राथमिकता पर उठाए सवाल
हाईकोर्ट ने कहा कि जुलाई से लगातार स्कूलों में हादसे हो रहे हैं। भरतपुर और बूंदी के स्कूलों में भी ऐसी घटनाएं सामने आ चुकी हैं लेकिन इसके बावजूद सरकार अब तक केवल मरम्मत के टेंडर जारी कर रही है। अदालत ने सवाल उठाया कि आखिर सरकार करना क्या चाहती है। ऐसा लगता है कि स्कूल उसकी प्राथमिकता में ही नहीं हैं।
कोर्ट ने यह भी कहा कि जरूरत पड़ी तो चार्टर्ड इंजीनियर नियुक्त किए जा सकते हैं, ताकि 1 जुलाई से केवल उन्हीं स्कूलों का संचालन हो, जिन्हें इंजीनियर सुरक्षित होने का प्रमाण पत्र दें, बाकी स्कूलों में पहले मरम्मत का काम कराया जाए।
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बजट सरकार की समस्या
सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से बजट की समस्या का हवाला दिया गया और ऐसा आदेश नहीं देने का आग्रह किया गया। इस पर कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि बजट सरकार की समस्या हो सकती है, अदालत की नहीं। अदालत ने कहा कि उसके आदेशों की हर हाल में पालना होनी चाहिए।
मुख्य सचिव को शपथ-पत्र पेश करने के निर्देश
अदालत ने कहा कि प्रमुख शासन सचिव से रिपोर्ट मांगी गई थी लेकिन महाधिवक्ता ने बताया कि उन्हें भी अभी तक रिपोर्ट नहीं मिली है। इस पर कोर्ट ने निर्देश दिया कि मुख्य सचिव शपथ-पत्र पेश कर यह बताएं कि अब तक कोर्ट के आदेशों की पालना में क्या कार्रवाई की गई है।