राजस्थान की ऐतिहासिक और विशिष्ट मोबाइल सर्जिकल यूनिट (एमएसयू), जयपुर के पुनः सशक्त संचालन की मांग को लेकर मोबाइल सर्जिकल यूनिट बचाओ संघर्ष समिति ने राज्य सरकार से गंभीर पहल की अपील की है। समिति ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार शीघ्र ठोस कदम नहीं उठाती तो चिकित्सा सुविधाओं से वंचित ग्रामीण गरीबों को गहरा नुकसान होगा। संघर्ष समिति के संयोजक रामसहाय ब्रह्मभट्ट ने बताया कि एमएसयू की स्थिति बेहद चिंताजनक है। सरकार द्वारा पूर्व में स्वीकृत 165 पदों में से आज मात्र 27 पद ही अस्तित्व में बचे हैं। उन्होंने कहा कि हमने राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी, शिक्षा मंत्री मदन दिलावर सहित कई वरिष्ठ नेताओं को ज्ञापन सौंपा है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
समिति के महामंत्री मोहनलाल शर्मा ने जानकारी दी कि एमएसयू की स्थापना वर्ष 1956 में की गई थी, ताकि दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं सुलभ करवाई जा सकें। यह एशिया की एकमात्र ऐसी यूनिट है, जिसमें ए श्रेणी की सभी चिकित्सा सुविधाएं एक मोबाइल अस्पताल में उपलब्ध थीं। इसकी क्षमता 500 बिस्तरों की थी, जिसे जरूरत पड़ने पर 1000 तक बढ़ाया जा सकता था। अब तक इस यूनिट के माध्यम से 1,200 से अधिक शिविरों का आयोजन किया जा चुका है, जिनमें 41 लाख से अधिक मरीजों को ओपीडी सेवाएं तथा 4.35 लाख सफल सर्जिकल ऑपरेशन प्रदान किए गए हैं। वर्ष 2015 से 2020 के बीच ही 45 शिविरों में 56,557 ओपीडी मरीजों और 10,874 ऑपरेशनों का रिकॉर्ड दर्ज है।
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समिति के मीडिया प्रभारी मदनलाल डांगी ने बताया कि मार्च 2024 में सरकार द्वारा अनेक पदों को समाप्त कर दिया गया, जिससे यूनिट के संचालन में बाधा उत्पन्न हो रही है। वर्तमान में केवल एमबीबीएस स्तर के चिकित्सा अधिकारी नियुक्त हैं, जिससे जटिल ऑपरेशनों की सुविधा ठप पड़ी है। उन्होंने बताया कि पूर्व में यूनिट में वरिष्ठ विशेषज्ञ (7), कनिष्ठ विशेषज्ञ (9), चिकित्सा अधिकारी (7), नर्स प्रथम (16), नर्स द्वितीय (34) सहित कुल 165 पद स्वीकृत थे। लेखाकार और प्रशासनिक पदों के अभाव में यूनिट का प्रबंधन भी चरमराया हुआ है।
संघर्ष समिति द्वारा सरकार से की गई प्रमुख मांगों में सभी पूर्व पदों को यथावत पुनः बहाल किए जाने, एमएसयू का संचालन पूर्ण क्षमता के साथ शुरू किए जाने, सैटलाइट अस्पताल को एमएसयू निदेशक के अधीन करने, एमएसयू निदेशक के पद पर विशेषज्ञ (पीजी) चिकित्सक की नियुक्ति करने संबंधी मांगें शामिल हैं। समिति ने कहा है कि यह यूनिट राज्य की 8 करोड़ जनता, विशेषकर ग्रामीण और वंचित तबके के लिए जीवनरक्षक साबित हुई है। सरकार यदि चिकित्सा के क्षेत्र में सच्चे सुधार की इच्छुक है तो उसे मोबाइल सर्जिकल यूनिट की पुनर्बहाली पर तुरंत अमल करना चाहिए।