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फसल बीमा का सच: किसान बढ़े लेकिन बीमित रकबा घटकर 36% हुआ, पांच साल में 8,568 करोड़ रुपये क्लेम में अटके

Fri, 24 Jul 2026 03:43 PM IST
प्रिया वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर

सार

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को लेकर लोकसभा में पेश आंकड़ों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। राज्य में जहां योजना से जुड़ने वाले किसानों की संख्या बढ़ी है, वहीं बीमित रकबा 39 से घटकर 36 प्रतिशत रह गया है।
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प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में घट रही किसानों की भागीदारी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत राजस्थान में किसानों की संख्या लगातार बढ़ रही है लेकिन बीमित कृषि क्षेत्र हर साल सिमटता जा रहा है। लोकसभा में पेश कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार पिछले पांच वर्षों में राज्य में बीमित रकबे का दायरा लगातार घटा है। वहीं किसानों, राज्य सरकार और केंद्र सरकार से प्रीमियम के रूप में जुटाई गई राशि का करीब एक-तिहाई हिस्सा किसानों को क्लेम के रूप में वापस नहीं मिला।

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कृषि मंत्रालय ने सांसद राहुल कस्वां और बृजेंद्र सिंह ओला के सवाल के लिखित जवाब में बताया कि 2021-22 में प्रदेश के कुल बोए गए रकबे का 39 प्रतिशत हिस्सा फसल बीमा के दायरे में था, जो 2025-26 में घटकर 36 प्रतिशत रह गया। इस दौरान बीमित रकबा 107.10 लाख हैक्टेयर से घटकर 101.50 लाख हैक्टेयर रह गया, जबकि कुल बोया गया क्षेत्र लगभग 275 से 282 लाख हैक्टेयर के बीच स्थिर रहा।
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23 जिलों में घटा बीमा कवरेज
जिला स्तर के आंकड़े बताते हैं कि यह गिरावट पूरे प्रदेश में देखने को मिली। 33 में से 23 जिलों में बीमित क्षेत्र का प्रतिशत कम हुआ, जबकि केवल 10 जिलों में सुधार दर्ज किया गया। सबसे अधिक गिरावट बूंदी और जैसलमेर में 19-19 प्रतिशत अंक की रही। इसके बाद बीकानेर (16%), भीलवाड़ा (15%), चित्तौड़गढ़ और कोटा (13-13%) का स्थान रहा। वहीं सुधार वाले जिलों में नागौर सबसे आगे रहा, जहां बीमा कवरेज 16 प्रतिशत अंक बढ़कर 47 प्रतिशत पहुंच गया। जोधपुर में भी 14 प्रतिशत अंक की वृद्धि दर्ज की गई।

17 जिलों में 30% से भी कम बीमा
2025-26 में प्रदेश के 33 में से केवल दो जिले-बाड़मेर (69%) और चूरू (77%) ऐसे रहे, जहां आधे से अधिक कृषि क्षेत्र का बीमा हुआ। इसके विपरीत 17 जिलों में बीमा कवरेज 30 प्रतिशत से भी कम रहा। इनमें धौलपुर (5%), करौली (7%), दौसा (9%), बांसवाड़ा, राजसमंद और सिरोही (12-12%) सबसे निचले पायदान पर रहे।



रकबा घटा लेकिन बढ़े किसान
खास बात यह है कि जहां बीमित क्षेत्र घटा, वहीं योजना से जुड़ने वाले किसानों की संख्या बढ़ी है। वर्ष 2024-25 में करीब 54 लाख किसानों ने योजना का लाभ लिया था, जो 2025-26 में बढ़कर 62.58 लाख हो गई। यानी करीब 9 लाख नए किसान योजना से जुड़े लेकिन कुल बीमित रकबा फिर भी कम हो गया।

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26,757 करोड़ रु. प्रीमियम, क्लेम मिला 18,189 करोड़
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक पिछले पांच वर्षों में किसानों, राज्य सरकार और केंद्र सरकार ने मिलकर 26,757.56 करोड़ रुपये का प्रीमियम जमा कराया। इसमें किसानों का योगदान 4,650.78 करोड़, राज्य सरकार का 11,253.68 करोड़ और केंद्र सरकार का 10,853.10 करोड़ रुपये रहा। इसके मुकाबले बीमा कंपनियों ने किसानों को 18,189.16 करोड़ रुपये का ही क्लेम दिया। यानी करीब 8,568 करोड़ रुपये, जो कुल प्रीमियम का लगभग एक-तिहाई है, किसानों को मुआवजे के रूप में वापस नहीं मिला।

किसान नेता ने उठाए सवाल
किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट ने दावा किया कि फसल बीमा योजना का मौजूदा स्वरूप किसानों की बजाय बीमा कंपनियों को अधिक फायदा पहुंचा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रीमियम चाहे केंद्र दे, राज्य सरकार दे या किसान, आखिरकार यह पैसा किसानों का ही है लेकिन सबसे ज्यादा लाभ बीमा कंपनियों को मिल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले पांच वर्षों में बीमा कंपनियों ने हजारों करोड़ रुपये का लाभ कमाया, जबकि किसान आज भी क्लेम के लिए भटकने को मजबूर हैं।

सरकार का पक्ष
इधर राज्य के कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल मीणा का कहना है कि केंद्र और राज्य सरकार का उद्देश्य अधिक से अधिक किसानों को फसल बीमा योजना का लाभ दिलाना है। उन्होंने कहा कि किसानों को समय पर क्लेम मिले और योजना अधिक प्रभावी बने, इसके लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

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