राजस्थान में मानसून शनिवार को पूरी तरह विदा हो गया। इस बार मानसून की विदाई करीब तीन दिन देर से हुई और पूरे सीजन में सामान्य से करीब 22 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई। बारिश की कमी के साथ सबसे बड़ी चिंता यह है कि कई जिलों में बरसात बेहद असमान रही। इसका असर अब फसल, बांधों के पानी और आने वाली गर्मियों में पेयजल व्यवस्था पर दिखाई दे सकता है।
11 से ज्यादा जिलों में सूखे के हालात
कम बारिश का असर अब खेतों तक साफ दिखाई देने लगा है। शुरुआती सर्वे के आधार पर प्रदेश के 11 से ज्यादा जिलों में सूखे जैसे हालात सामने आए हैं। इनमें पाली, जैसलमेर और जालोर की स्थिति सबसे ज्यादा खराब बताई जा रही है। इन जिलों की कई तहसीलों में सामान्य से 50 फीसदी तक कम बारिश हुई है।
इस बार बारिश कम भी रही और छितराई भी
राजस्थान में इस मानसून की सबसे बड़ी समस्या सिर्फ कम बारिश नहीं रही, बल्कि इसका एक समान नहीं होना भी रहा। जून और जुलाई में बारिश लगभग सामान्य रही, लेकिन अगस्त और सितंबर में मानसून कमजोर पड़ गया। दक्षिणी राजस्थान के ज्यादातर जिलों में भी सामान्य से कम बारिश हुई।
मौसम विभाग के मुताबिक मानसून से पहले ही अल नीनो के असर के चलते कमजोर और छितराई बारिश का अनुमान था। सीजन के दौरान भी यही स्थिति देखने को मिली। मानसूनी सिस्टम मैदानी इलाकों की बजाय हिमालय की ओर ज्यादा सक्रिय रहे, जिससे प्रदेश के कई हिस्सों में पर्याप्त बारिश नहीं हो सकी।
24 सामान्य जिलों में भी 18 का आंकड़ा माइनस में
मौसम विभाग सामान्य से 19 फीसदी तक कम बारिश को भी सामान्य श्रेणी में रखता है। इसी आधार पर इस बार प्रदेश के 24 जिलों को सामान्य बारिश वाले जिलों में शामिल किया गया है। लेकिन इन 24 में से 18 जिलों में बारिश का आंकड़ा सामान्य से कम है।
टोंक, जयपुर और चित्तौड़गढ़ में सामान्य से करीब 17 फीसदी तक कम बारिश हुई। बारां और अजमेर में भी बारिश सामान्य से 15 फीसदी कम रही। सामान्य श्रेणी में शामिल केवल छह जिलों में बारिश का आंकड़ा प्लस में रहा। पूरे प्रदेश में सिर्फ धौलपुर, डीग और सलूम्बर ऐसे जिले रहे जहां सामान्य से 24 फीसदी से ज्यादा बारिश हुई। यहां बारिश 24 से 28 फीसदी तक अधिक दर्ज की गई।
पिछले साल से बिल्कुल उलटी तस्वीर
पिछले मानसून से तुलना करें तो इस बार तस्वीर काफी बदल गई है। पिछले साल 23 जिलों में सामान्य से 60 फीसदी से ज्यादा बारिश दर्ज की गई थी। इस बार एक भी जिला ऐसा नहीं रहा जहां इतनी अधिक बारिश हुई हो।
पिछले साल सिर्फ एक जिला सामान्य बारिश की श्रेणी में था, जबकि इस बार 24 जिले इस श्रेणी में आए हैं। वहीं पिछले साल बारिश की कमी वाला एक भी जिला नहीं था, जबकि इस बार 14 जिले कम बारिश की श्रेणी में हैं।