राजस्थान में हवामहल विधानसभा से विधायक बालमुकुंद आचार्य ने अमर उजाला से बातचीत करते हुए पूर्व सीएम अशोक गहलोत के बयान पर जवाब दिया है। विधायक बालमुकुंद ने कहा, जब कांग्रेस अपने ही प्रधानमंत्री को भारत रत्न दिया करती थी, तब गहलोत ने कोई सवाल नहीं उठाया। आज जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के उन चुनिंदा लोगों को चुनकर जिन्होंने देश के विकास के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया, उन्हें भारत रत्न दिया तो अशोक गहलोत को तकलीफ हो रही है।
विधायक आचार्य ने कहा, अशोक गहलोत की यह तकलीफ इसलिए भी ज्यादा बढ़ जाती है। क्योंकि उनकी पार्टी में उनका सुनने वाला कोई नहीं है। गहलोत की पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे खुद को गौरव बताते हैं और भारतीय जनता पार्टी को पांडव कहते हैं। अब ऐसे में अशोक गहलोत आलोचना करें तो किसकी करें, शिकायत करें तो किसकी करें। यह मजबूरी है अशोक गहलोत की इस कारण से गहलोत इस तरीके के बयान देते हैं।
वहीं, भाजपा पेनालिस्ट मदन प्रजापत ने अशोक गहलोत के भारत रत्न में राजनीतिकरण के बयान का जवाब देते हुए कहा कि जब कांग्रेस अपने प्रधानमंत्री को भारत रत्न देती थी, तब कोई दिक्कत या आपत्ति इनको नहीं होती थी। आज देश के प्रधानमंत्री जिन्होंने देश के हर वर्ग के लिए सोच हर वर्ग के लिए काम किया और हर वर्ग को फायदा पहुंचाया। अगर वह देश का प्रधानमंत्री उन चुनिंदा लोगों को भारत रत्न देता है, जिन्होंने देश का मान सम्मान सदा बढ़ाया, देश की एकता अखंडता को बनाए रखने में अपना सहयोग दिया तो कांग्रेस को बहुत तकलीफ होती है।
गहलोत ने क्या कहा था?
अशोक गहलोत ने अपने ट्वीटर हैंडल पर लिखा कि भारत सरकार द्वारा पांच विभूतियों को भारत रत्न दिए जाने का स्वागत करते हैं। इन विभूतियों के लिए हमारे दिल में अथाह सम्मान है एवं देश के लिए इनका योगदान अतुलनीय है। अशोक गहलोत ने आगे लिखा कि हालांकि ऐसा लगता है कि एक वर्ष में अधिकतम तीन भारत रत्न देने के नियम को तोड़कर आनन-फानन में भारत रत्न देकर इस सम्मान का चुनावीकरण एवं राजनीतिकरण किया गया है एवं सम्मान की गरिमा कम की गई है। मुझे नहीं लगता है कि इन निर्णयों से एनडीए को बहुत बड़ा लाभ मिल सकेगा।
'ये सम्मान सिर्फ चुनावी लाभ के लिए हैं'
गहलोत ने आगे कहा, यदि एनडीए सरकार सच में इनके योगदान को सम्मानित करना चाहती है तो कर्पूरी ठाकुर द्वारा पिछड़ों के उत्थान के लिए किए गए प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए जातिगत जनगणना करवाए, चौधरी चरण सिंह एवं एमएस स्वामीनाथन की मांग अनुसार न्यूनतम समर्थन मूल्य का कानून बनाए एवं पीवी नरसिम्हा राव द्वारा बनाए गए प्लेस ऑफ वर्शिप एक्ट की पालना सुनिश्चित करवाए जिसकी आजकल रोज अवहेलना की जा रही है। एनडीए सरकार के दौरान लालकृष्ण अडवाणी द्वारा जताई गई अघोषित आपातकाल जैसी आशंका के माहौल को सामान्य करने का प्रयास करे। अन्यथा सब यही मानेंगे कि ये सम्मान सिर्फ चुनावी लाभ के लिए हैं।