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जल जीवन मिशन घोटाला: महेश जोशी को हाईकोर्ट से झटका, जमानत याचिका खारिज

Thu, 13 Aug 2026 03:15 PM IST
आशुतोष प्रताप सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर

सार

राजस्थान हाईकोर्ट ने जल जीवन मिशन से जुड़े कथित करीब 20 हजार करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार मामले में पूर्व जलदाय मंत्री महेश जोशी समेत कई आरोपियों को राहत नहीं दी। जस्टिस चंद्रप्रकाश श्रीमाली की एकलपीठ ने पूर्व मंत्री, अधिकारियों और निजी व्यक्तियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं।
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महेश जोशी की जमानत पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राजस्थान हाईकोर्ट की एकलपीठ ने जल जीवन मिशन से जुड़े कथित करीब 20 हजार करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार मामले में पूर्व जलदाय मंत्री महेश जोशी समेत कई मुख्य आरोपियों को बड़ा झटका दिया है। जस्टिस चंद्रप्रकाश श्रीमाली की पीठ ने पूर्व मंत्री सहित कई अधिकारियों और निजी व्यक्तियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं। अदालत ने 5 अगस्त को सभी पक्षों की बहस पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रखा था। अब फैसला सुनाते हुए अदालत ने आरोपियों को जमानत देने से इनकार कर दिया।

सरकारी पक्ष ने जमानत का किया कड़ा विरोध

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता राजेश चौधरी, अधिवक्ता नेहा गोयल, अमन अग्रवाल और विनोद कुमार शर्मा ने आरोपियों की जमानत याचिकाओं का कड़ा विरोध किया। सरकारी पक्ष ने अदालत के सामने दलील दी कि जल जीवन मिशन में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं हुईं और पद का दुरुपयोग किया गया।

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सरकारी पक्ष ने कहा कि तत्कालीन मंत्री होने के नाते महेश जोशी विभाग के प्रमुख थे। आरोप है कि उन्होंने अन्य आरोपियों के साथ मिलीभगत कर ऊंची दरों पर टेंडर स्वीकृत कराने में भूमिका निभाई। अदालत ने राज्य सरकार की ओर से रखी गई दलीलों को विचारणीय मानते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया।

बचाव पक्ष ने गिरफ्तारी और भूमिका पर उठाए सवाल

वहीं, पूर्व मंत्री महेश जोशी की ओर से अधिवक्ता स्नेहदीप ने जमानत के पक्ष में दलीलें पेश कीं। उन्होंने कहा कि प्राथमिकी दर्ज होने के करीब डेढ़ वर्ष बाद जांच एजेंसी ने पूर्व मंत्री को गिरफ्तार किया। अप्रैल से दिसंबर 2025 तक प्रवर्तन निदेशालय की हिरासत में रहने के दौरान भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने उन्हें हिरासत में नहीं लिया था। बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि महेश जोशी निविदा मूल्यांकन अथवा वित्त समिति के सदस्य नहीं थे और टेंडर से संबंधित कार्य प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से संपादित किया गया था।

अधीक्षण अभियंता के वकील ने भी रखी दलील

मामले में तत्कालीन अधीक्षण अभियंता महेंद्र प्रकाश सोनी की ओर से अधिवक्ता सुधीर जैन ने भी अदालत में पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि समान तथ्यों के आधार पर कई प्राथमिकियां दर्ज की गई हैं दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट की एकलपीठ ने पूर्व मंत्री महेश जोशी समेत मामले में नामजद अन्य आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। अदालत के इस आदेश से जल जीवन मिशन से जुड़े कथित भ्रष्टाचार मामले में आरोपियों को फिलहाल राहत नहीं मिली है।

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