राजस्थान में पांच दिन के भीतर सीकर और दौसा जिलों में परीक्षा के दौरान सामूहिक नकल के दो बड़े मामले सामने आए हैं। दोनों स्थानों पर पीजीडीसीए की परीक्षा में खुलेआम नकल कराई जा रही थी। विजिलेंस जांच और शिकायतों के आधार पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने दोनों परीक्षा केंद्रों की परीक्षाओं को निरस्त कर दिया है।
छापे में पकड़ी गई सामूहिक नकल
सीकर स्थित विश्वभारती कॉलेज में विजिलेंस टीम ने अचानक छापा मारकर सामूहिक नकल का भंडाफोड़ किया। निरीक्षण के दौरान तीन कमरों में कुल 72 विद्यार्थी प्रिंटेड कागज की सामग्रियों से खुलेआम नकल करते हुए पाए गए। आरोप है कि केंद्र पर मौजूद शिक्षक ही ऊपर से मिले निर्देशों का हवाला देकर परीक्षार्थियों को नकल करवा रहे थे। गौरतलब है कि सीकर से ही इस वर्ष नीट परीक्षा का पर्चा लीक होने का मामला भी सबसे पहले दर्ज हुआ था। इससे पूर्व 7 अगस्त को दौसा जिले के लालसोट में स्थित एमडी पीजी कॉलेज में भी पीजीडीसीए परीक्षा के दौरान धड़ल्ले से सामूहिक नकल का मामला सामने आया था। इस केंद्र पर परीक्षा दे रहे सभी अभ्यर्थी सरकार के कंप्यूटर अनुदेशक पद की अर्हता प्राप्त करने के लिए परीक्षा में शामिल हुए थे।
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विश्वविद्यालय प्रशासन की कड़ी कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए कुलगुरु प्रो. मदनमोहन झा तथा परीक्षा नियंत्रक डॉ. शंभुकुमार झा ने विश्वभारती कॉलेज में आयोजित परीक्षा को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है। इसके साथ ही संबंधित परीक्षा केंद्र को निलंबित करते हुए कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया आरंभ कर दी गई है। नकल के इन मामलों को लेकर विपक्षी दलों ने भी राज्य सरकार की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए हैं। विपक्ष के नेता टीकाराम जूली ने आरोप लगाया कि प्रदेश में नकल माफिया बेखौफ होकर काम कर रहे हैं, जिससे दिन-रात मेहनत करने वाले युवाओं के भविष्य पर संकट गहरा गया है।
सात हजार से अधिक मामले दर्ज
विधानसभा में प्रस्तुत किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों में वर्ष 2024 तक नकल के 7,000 से अधिक मामले दर्ज किए जा चुके हैं। अकेले राजस्थान विश्वविद्यालय में वर्ष 2019 में 1,000, वर्ष 2020 में 430, वर्ष 2021 में 351, वर्ष 2022 में 820, वर्ष 2023 में 1,011 तथा वर्ष 2024 में 536 परीक्षार्थी नकल करते हुए पकड़े गए। इसके अतिरिक्त डॉ. भीमराव अंबेडकर विधि विश्वविद्यालय में जून 2024 तक 300 से अधिक मामले दर्ज हुए। कोटा विश्वविद्यालय में वर्ष 2019 से 2023 के दौरान करीब 550, गोविंद गुरु जनजाति विश्वविद्यालय में वर्ष 2023 में 26 तथा हरदेव जोशी पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय में वर्ष 2024 में केवल एक मामला सामने आया है।