फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

राजस्थान: हाईकोर्ट का जेएसओ भर्ती पर बड़ा आदेश, नियुक्तियां याचिका के अंतिम फैसले के अधीन रहेंगी

Thu, 29 Oct 2026 09:44 AM IST
आशुतोष प्रताप सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर

सार

राजस्थान हाईकोर्ट ने राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में जूनियर साइंटिफिक ऑफिसर (जेएसओ) के पदों पर होने वाली नियुक्तियों को याचिका के अंतिम फैसले के अधीन रखने का आदेश दिया है। याचिकाकर्ता सतीश कुमार अमेता ने 206 अंक मिलने और सामान्य वर्ग की 198 अंकों की कटऑफ पार करने के बावजूद अंतिम चयन सूची में जगह नहीं मिलने पर सवाल उठाए हैं।
विज्ञापन
राजस्थान हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

राजस्थान हाईकोर्ट ने राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में जूनियर साइंटिफिक ऑफिसर (जेएसओ) के पदों पर हो रही नियुक्तियों को लेकर अहम आदेश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि इन पदों पर होने वाली नियुक्तियां संबंधित याचिका के अंतिम फैसले के अधीन रहेंगी। मामले में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। वहीं, आवारा कुत्तों के प्रबंधन के मामले में भी हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। जयपुर पीठ ने संबंधित विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव से पांच नवंबर तक शपथपत्र पेश करने को कहा है। ऐसा नहीं करने पर उन्हें व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देना होगा।

जेएसओ भर्ती में चयन को लेकर हाईकोर्ट पहुंचा अभ्यर्थी

जोधपुर में जस्टिस कुलदीप माथुर की एकलपीठ ने राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में जेएसओ पदों पर नियुक्तियों को याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन रखने का आदेश दिया। अदालत ने राज्य सरकार और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोटिस जारी करते हुए मामले में जवाब पेश करने के लिए 27 नवंबर की तारीख तय की है। याचिकाकर्ता सतीश कुमार अमेता की ओर से अधिवक्ता आरसी जोशी ने अदालत में पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि अमेता को लिखित परीक्षा में 206 अंक मिले थे, जबकि सामान्य वर्ग की कटऑफ 198 अंक थी। याचिकाकर्ता का नाम दस्तावेज सत्यापन की सूची में भी शामिल था। इसके बावजूद चयन बोर्ड ने उन्हें अंतिम चयन सूची में जगह नहीं दी। याचिकाकर्ता का तर्क है कि कटऑफ से अधिक अंक हासिल करने और दस्तावेज सत्यापन सूची में नाम होने के बाद भी उन्हें चयन से बाहर कर दिया गया।

आरक्षित वर्ग के समायोजन पर उठाए सवाल

याचिका में आरोप लगाया गया कि आरक्षित और पिछड़े वर्ग के भूतपूर्व सैनिकों को सामान्य वर्ग की सीटों पर समायोजित किया गया। याचिकाकर्ता के अनुसार, इस समायोजन के कारण अधिक अंक प्राप्त करने वाले योग्य अभ्यर्थियों को चयन से वंचित होना पड़ा। इस मामले में हाईकोर्ट ने विपक्षी संख्या चार को भी नोटिस जारी कर 27 नवंबर तक जवाब मांगा है। राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता महेंद्र विश्नोई ने नोटिस स्वीकार किया। अदालत ने अपने आदेश में साफ किया कि जेएसओ पदों पर होने वाली नियुक्तियां याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन रहेंगी। अब मामले में संबंधित पक्षों के जवाब के बाद आगे की सुनवाई होगी।

आवारा कुत्तों के प्रबंधन पर हाईकोर्ट सख्त

दूसरी ओर, जयपुर पीठ ने राज्य में आवारा कुत्तों के प्रबंधन को लेकर बरती जा रही कथित ढिलाई पर सख्त रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश संजय के. अग्रवाल और न्यायमूर्ति समीर जैन की खंडपीठ ने संबंधित विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव से पांच नवंबर तक शपथपत्र पेश करने को कहा है। आवारा कुत्तों से जुड़े खतरे पर स्वप्रेरित प्रसंज्ञान के तहत सुनवाई करते हुए अदालत ने राज्य सरकार से उच्चतम न्यायालय के निर्देशों की पालना में उठाए गए कदमों की विस्तृत जानकारी मांगी। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि संबंधित विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव पांच नवंबर तक शपथपत्र पेश नहीं करते हैं, तो उन्हें व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देना होगा। इसी सुनवाई के दौरान अदालत ने इस विषय से जुड़ी लंबित चार अन्य याचिकाओं का भी निस्तारण कर दिया।

बस स्टैंड और सड़कों से आवारा कुत्तों को हटाने के निर्देशों पर सवाल

सुनवाई के दौरान न्यायमित्र अधिवक्ता प्रतीक कासलीवाल ने अदालत को बताया कि सार्वजनिक स्थानों, जैसे बस स्टैंड और सड़कों से आवारा कुत्तों को हटाने और उन्हें रेबीज-रोधी टीके लगाने के निर्देशों का प्रभावी ढंग से पालन नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि इस स्थिति से आमजन के जीवन पर गंभीर खतरा पैदा हो रहा है। खासकर बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई गई। आवारा कुत्तों के हमलों और रेबीज के खतरे को देखते हुए सार्वजनिक स्थानों पर प्रभावी प्रबंधन की जरूरत बताई गई।

नगर निगम और पशु चिकित्सा विभाग को समन्वय के निर्देश

मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण, नगर निगम और पशु चिकित्सा विभाग को आपसी समन्वय के साथ काम करने के निर्देश दिए। अदालत ने कहा कि आवारा कुत्तों के प्रबंधन को लेकर जमीनी स्तर पर निगरानी की जाए और लोगों को जागरूक करने के लिए अभियान चलाया जाए।

विज्ञापन

अदालत ने राज्य सरकार से उच्चतम न्यायालय के निर्देशों की पालना सुनिश्चित करने और इस संबंध में उठाए गए कदमों का ब्योरा देने को कहा है। अब संबंधित विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को पांच नवंबर तक शपथपत्र पेश करना होगा। वहीं, जेएसओ भर्ती मामले में 27 नवंबर तक जवाब दाखिल किया जाना है। दोनों मामलों में हाईकोर्ट के आदेशों के बाद संबंधित विभागों की कार्रवाई पर नजर रहेगी।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें