राजस्थान हाईकोर्ट ने साइबर ठगी के आरोप में जेल में बंद अलवर के दो आरोपियों को तीसरी बार भी जमानत देने से इनकार कर दिया है। जस्टिस अनूप कुमार ढंड की अदालत ने कहा कि पिछली जमानत याचिकाएं खारिज होने के बाद मामले की परिस्थितियों में ऐसा कोई अहम बदलाव नहीं हुआ है, जिसके आधार पर आरोपियों को राहत दी जा सके। कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को मुकदमे की सुनवाई जल्द पूरी करने के लिए हरसंभव प्रयास करने के निर्देश भी दिए।
मामला मेघराज सैनी और करण यादव की जमानत याचिकाओं से जुड़ा है। दोनों पर मुख्य आरोपी जसराज मीणा के साथ मिलकर लोगों को फोन पर अतिरिक्त कमाई का लालच देकर ठगी करने का आरोप है। दोनों की जमानत याचिकाएं पहले भी दो बार खारिज हो चुकी थीं। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट में तीसरी बार जमानत के लिए अर्जी लगाई थी।
गवाहों के बयान दर्ज होने की दी दलील
बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता कृष्ण कुमार छावाल और राकेश सैनी ने पैरवी की। उन्होंने अदालत में दलील दी कि दूसरी जमानत याचिका खारिज होने के बाद शिकायतकर्ता और अन्य गवाहों के बयान दर्ज हो चुके हैं। दोनों आरोपी गिरफ्तारी के बाद से जेल में हैं और मुकदमे की सुनवाई पूरी होने में समय लग सकता है। ऐसे में उन्हें जमानत दी जानी चाहिए।
वहीं, राज्य सरकार की ओर से पब्लिक प्रॉसिक्यूटर गौरव गुप्ता ने जमानत का विरोध किया। उन्होंने कहा कि जांच के बाद दोनों आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट पेश की गई थी। जांच में उनके अन्य आरोपियों के साथ मिलकर साइबर ठगी करने की बात सामने आई है। सरकारी पक्ष के अनुसार, आरोपी फोन पर लोगों को अतिरिक्त कमाई का लालच देते और फिर उनसे पैसे ऐंठते थे।
करण यादव के खिलाफ सात शिकायतों का हवाला
सुनवाई के दौरान सरकारी पक्ष ने करण यादव के खिलाफ इसी तरह के साइबर अपराध से जुड़ी सात शिकायतों का भी हवाला दिया। सरकार की ओर से दलील दी गई कि दोनों आरोपियों की पहले ही दो बार जमानत याचिकाएं खारिज हो चुकी हैं। इस बार भी ऐसा कोई नया तथ्य या परिस्थितियों में बड़ा बदलाव सामने नहीं आया है, जिसके आधार पर उन्हें जमानत दी जाए।
अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जमानत देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने माना कि पिछली याचिकाओं के बाद परिस्थितियों में ऐसा कोई महत्वपूर्ण बदलाव नहीं हुआ है, जो तीसरी बार जमानत देने का आधार बन सके।
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साइबर अपराध और ऑनलाइन ठगी पर जताई चिंता
हाईकोर्ट ने साइबर अपराध और ऑनलाइन धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों पर चिंता जताई। अदालत ने कहा कि इंटरनेट के जरिए होने वाली ठगी में बड़ी संख्या में लोग अपनी मेहनत की कमाई गंवा रहे हैं। डिजिटल तकनीक और ऑनलाइन बैंकिंग का इस्तेमाल बढ़ने के साथ साइबर अपराध के नए तरीके भी सामने आ रहे हैं।
अदालत ने ऑनलाइन बैंकिंग से जुड़ी धोखाधड़ी और फिशिंग का भी जिक्र किया। ऐसी ठगी में अपराधी लोगों की लॉगिन जानकारी या क्रेडिट और डेबिट कार्ड से जुड़ी जानकारी हासिल कर आर्थिक नुकसान पहुंचा सकते हैं। कोर्ट ने माना कि इस तरह के अपराध आम लोगों के लिए गंभीर समस्या बन रहे हैं।
ट्रायल जल्द पूरा करने के निर्देश
दोनों आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को मुकदमे की सुनवाई जल्द पूरी करने के लिए हरसंभव प्रयास करने को कहा। साथ ही स्पष्ट किया कि जमानत याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान की गई टिप्पणियों का असर मुकदमे के अंतिम फैसले पर नहीं पड़ना चाहिए।