राजस्थान की भजनलाल सरकार ने किया निर्णय।
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भ्रष्ट आचरण और काम में लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों के लिए चेतावनी है। राजस्थान सरकार अब ऐसे कर्मचारियों की सूची बनाकर उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने का निर्णय कर चुकी है। मुख्य सचिव सुधांश पंत ने पिछले दिनों सीनियर लेवल ऑफिसर्स की मीटिंग में यह निर्देश जारी किए है कि जो अधिकारी और कर्मचारी निष्पक्षता व पादर्शिता के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन नहीं कर रहे हैं। राजकार्य ने निरंतर अरुचि, भ्रष्ट आचारण और प्रशासनिक रूप से काम करने में असमर्थ हैं, ऐसे अधिकारियों और कर्मचारियों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसके लिए संबंधित विभागों को नियामानुसार संबंधित आवश्यक कार्यवाही कर प्रस्ताव संबंधित प्रशासनिक विभाग को भेजे जाने के निर्देश जारी किए गए हैं।
गौरतलब है कि राज्य सरकार ने राजस्थान सिविल सेवा (पेंशन) नियम 1996 के नियम 53(1) के तहत अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने के प्रावधान पहले से कर रखे हैं। इसके अनुसार अधिकारी और कर्मचारी जिन्होंने अपने सेवा काल के 15 वर्ष पूरे कर लिए हैं व अपनी अकर्मण्यता, संदेहास्पद सत्यनिष्ठा, अक्षमता, अकार्यकुशलता अथवा असंतोषजनक कार्यनिष्पादन के कारण जनहितार्थ उपयोगिता खो चुके हैं, ऐसे सरकारी अधिकारी व कर्मचारियों की स्क्रीनिंग कर तीन महीने के नोटिस या तीन महीने के वेतन भत्तों के भुगतान के साथ उन्हें तुरंत प्रभाव से राज्य सेवा से कार्यमुक्त किया जा सकेगा।