लखनऊ में चुनाव प्रचार के दौरान मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता को संबोधित किया। पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि राजस्थान में धर्म के आधार पर आरक्षण नहीं दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि संविधान के अंदर जो भी व्यवस्था है और जिस प्रकार से संविधान आरक्षण का प्रावधान करता है, उसी के अनुसार ही आरक्षण दिया जाएगा। मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा, "राजस्थान में धर्म के आधार पर आरक्षण नहीं दिया जाएगा। हम संविधान का सम्मान करते हैं और उसी के अनुसार नीतिया बनाते हैं। आरक्षण का लाभ केवल उन्हीं समुदायों को मिलेगा, जिन्हें संविधान में इसके लिए पात्र माना गया है।" उनका यह बयान उन अफवाहों का जवाब था, जिनमें कहा जा रहा था कि राज्य सरकार धर्म के आधार पर आरक्षण देने की योजना बना रही है।
मुख्यमंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि वे इस मुद्दे पर इसलिए बात कर रहे हैं क्योंकि हाल ही में बंगाल में ममता बनर्जी की सरकार ने धर्म के आधार पर आरक्षण देने की बात की थी। उन्होंने कहा, "हमारी सरकार का स्पष्ट मानना है कि आरक्षण का आधार केवल सामाजिक और आर्थिक पिछड़ापन होना चाहिए, न कि धर्म। हम इस मुद्दे पर कोई समझौता नहीं करेंगे। मुख्यमंत्री शर्मा ने यह भी कहा कि राजस्थान सरकार अपने राज्य के विकास और सामाजिक न्याय के प्रति प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, "हमारा उद्देश्य हर वर्ग के लोगों को समान अवसर प्रदान करना है और इसके लिए हम सभी आवश्यक कदम उठा रहे हैं।
प्रेस वार्ता के दौरान मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर भी निशाना साधा और कहा कि कुछ लोग समाज में भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा, "विपक्षी दल बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं और जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन हमारी सरकार सच्चाई के साथ खड़ी है और हम जनता को सच्चाई से अवगत कराते रहेंगे। मुख्यमंत्री शर्मा ने राज्य की जनता से अपील की कि वे इन अफवाहों पर ध्यान न दें और सरकार के साथ मिलकर राज्य के विकास में सहयोग करें। उन्होंने कहा, "हम सब मिलकर राजस्थान को एक समृद्ध और विकसित राज्य बना सकते हैं। इसके लिए हमें एकजुट होकर काम करना होगा और किसी भी प्रकार के भ्रामक प्रचार से बचना होगा।