राजस्थान के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों बच्चों के मिड-डे मील की व्यवस्था पर बर्तनों की कमी भारी पड़ रही है। नए बर्तन खरीदने के लिए करोड़ों रुपये का बजट उपलब्ध होने के बावजूद प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है। विवाद इस बात पर है कि खरीद का अधिकार सीधे स्कूलों को दिया जाए या विभाग केंद्रीय स्तर पर खरीद करे। इस खींचतान के बीच स्कूलों में पुराने और टूटे बर्तनों से बच्चों को खाना परोसा जा रहा है।
16 साल पुराने बर्तनों से परोसा जा रहा खाना
स्कूलों में मिड-डे मील के लिए इस्तेमाल होने वाले बर्तन वर्ष 2009 में खरीदे गए थे। यानी करीब 16 साल बाद भी कई स्कूलों में उन्हीं बर्तनों से बच्चों को भोजन दिया जा रहा है। पड़ताल में सामने आया कि कई जगह थालियां मुड़ चुकी हैं, पतीलों में छेद हो गए हैं और दूसरे बर्तन भी टूट-फूट चुके हैं। कुछ स्कूलों में बर्तन इतने कम बचे हैं कि बच्चों को घर से थाली लानी पड़ती है। वहीं, कुछ जगह एक ही थाली में दो बच्चों को खाना खिलाने की स्थिति भी सामने आई है।
छात्र संख्या के आधार पर स्कूलों को मिलनी है राशि
नए बर्तनों की खरीद के लिए स्कूलों को विद्यार्थियों की संख्या के आधार पर बजट देने की योजना बनाई गई है। प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार:
- 50 तक विद्यार्थी वाले 25,476 स्कूलों को 10-10 हजार रुपये।
- 150 तक विद्यार्थी वाले 21,412 स्कूलों को 15-15 हजार रुपये।
- 250 तक विद्यार्थी वाले 5,620 स्कूलों को 20-20 हजार रुपये।
- 251 से अधिक विद्यार्थी वाले 1,230 स्कूलों को 25-25 हजार रुपये।
इस तरह कुल 53,738 सरकारी स्कूलों को नए बर्तन खरीदने के लिए राशि दी जानी है।
केंद्र और राज्य सरकार मिलकर दे रहे बजट
नए बर्तनों की खरीद के लिए कुल 71 करोड़ 90 लाख 90 हजार रुपये का बजट तय किया गया है। इसमें केंद्र सरकार का हिस्सा 43 करोड़ 14 लाख 54 हजार रुपये और राज्य सरकार का हिस्सा 28 करोड़ 76 लाख 36 हजार रुपये है।
बजट तय होने के बावजूद खरीद प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई है। शिक्षा मंत्री मदन दिलावर चाहते हैं कि खरीद का अधिकार सीधे स्कूलों को दिया जाए, ताकि वे अपनी जरूरत के अनुसार स्थानीय स्तर पर बर्तन खरीद सकें। दूसरी ओर, विभागीय अधिकारियों का तर्क है कि केंद्रीकृत खरीद से बर्तनों की गुणवत्ता और एकरूपता बनाए रखना आसान होगा।
शिक्षक और अभिभावक बोले- बच्चों को जल्द मिलें बर्तन
शिक्षकों का एक वर्ग भी स्कूलों को स्थानीय स्तर पर खरीद का अधिकार देने के पक्ष में है। शिक्षक संघ के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष सियाराम का कहना है कि स्कूलों को अधिकार मिलने से वे अपनी जरूरत के मुताबिक तत्काल बर्तन खरीद सकेंगे। वहीं, अभिभावकों का कहना है कि खरीद की व्यवस्था सरकार को तय करनी चाहिए, लेकिन बच्चों के लिए नए बर्तन उपलब्ध कराने में देरी नहीं होनी चाहिए।
कांग्रेस ने सरकार को घेरा
बर्तनों की खरीद में देरी को लेकर कांग्रेस ने भी सरकार पर निशाना साधा है। पूर्व कैबिनेट मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने आरोप लगाया कि सरकार की प्राथमिकता में अब बच्चों की थाली भी नहीं है। इस मुद्दे पर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच सरकारी स्कूलों में नए बर्तनों की खरीद का इंतजार बना हुआ है।