राजस्थान विधानसभा में बजट विनियोग विधेयक 2026 पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने तीखा प्रहार करते हुए भजनलाल सरकार के दावों को तथ्यों के आधार पर ध्वस्त कर दिया। करीब एक घंटे के अपने संबोधन में जूली ने सरकार के '5 साल बनाम 2 साल' के नैरेटिव को 'क्रेडिट पॉलिटिक्स' करार दिया और कहा कि मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री मोदी की उन गारंटियों की हवा निकाल दी है, जिन्हें चुनाव के दौरान 'गारंटी पूरा होने की गारंटी' कहा गया था।
मोदी की 'गारंटी' और सरकार का 'यू-टर्न'
जूली ने सदन को याद दिलाया कि प्रधानमंत्री ने चित्तौड़गढ़ की रैली में वादा किया था कि कांग्रेस की जनहितकारी योजनाएं बंद नहीं होंगी। लेकिन हकीकत यह है कि स्वास्थ्य का अधिकार (RTH) भाजपा सरकार ने इसे अनावश्यक बताकर जनता को मुफ्त इलाज के कानूनी हक से वंचित कर दिया। गिग वर्कर्स वेलफेयर एक्ट, ऑनलाइन डिलीवरी पार्टनर्स के लिए बना क्रांतिकारी कानून ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। इसी तरह स्मार्टफोन व अन्नपूर्णा किट जो कि महिलाओं को डिजिटल सशक्तिकरण देने वाली स्मार्टफोन योजना और महंगाई से राहत देने वाली राशन किट योजना पूरी तरह बंद कर दी गई है। इतना ही नहीं सरकार ने राजीव गांधी स्कॉलरशिप में लाभार्थियों की संख्या 500 से घटाकर मात्र 150 कर दी गई।
दिल्ली दौरों की विफलता: 14% हिस्से का नुकसान
जूली ने खुलासा किया कि मुख्यमंत्री के दिल्ली दौरों के बावजूद राजस्थान को वित्तीय नुकसान हुआ है। SASCI स्कीम में कांग्रेस सरकार के समय राजस्थान को कुल फंड का 20.31% हिस्सा मिला था, जो भाजपा सरकार के समय गिरकर मात्र 6% रह गया है। उन्होंने तंज कसा कि मुख्यमंत्री दिल्ली जाकर राजस्थान के हक में 14% की कटौती करवाकर आए हैं।
कानून व्यवस्था: हर 14 मिनट में बेटी की चीख
प्रदेश की कानून व्यवस्था पर चिंता जताते हुए जूली ने कहा कि राजस्थान में हर 14 मिनट में महिला अत्याचार का मामला दर्ज हो रहा है। उन्होंने पिछले दो वर्षों के आंकड़े पेश किए। उन्होंने कहा कि महिलाओं के साथ होने वाले यौन अपराधों में 11,779 (औसत 15 प्रतिदिन) की वृ्द्धि हुई है। वहीं, हत्याओं के मामलों में भी इजाफा हुआ है।
अपनी जांच से क्यों डरती है सरकार?
जूली ने ओएमआर घोटाले पर मुख्यमंत्री के बयान को हास्यास्पद बताते हुए कहा कि जो अपराधी 2019 से 2026 तक सिस्टम में जमा रहा, उसे क्लीन चिट देना युवाओं के साथ धोखा है। उन्होंने मांग की कि वर्ष 2015 से 2026 तक की सभी भर्तियों की सीबीआई जांच हो और जांच का दायरा केवल 2023 तक सीमित न रहे।
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क्रेडिट पॉलिटिक्स पर शायराना प्रहार
जूली ने कहा कि सरकार पुरानी ईंटों पर नया रंग लगाकर फीता काट रही है। उन्होंने एक कहानी के जरिए तंज कसा कि महाराज ने दो साल में पांच साल का काम नहीं किया, बल्कि पांच साल के काम पर दो साल का नाम लिख दिया। अंत में उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मुख्यमंत्री ने अपनी नजर नहीं बदली, तो जनता चश्मा बदलेगी और फिर सरकार नजर नहीं आएगी।