राजस्थान में निकाय चुनाव का काउंटडाउन शुरू होने के साथ ही सड़कों और गड्ढों का मुद्दा भी सरकार की प्राथमिकता में आ गया है। मानसून के दौरान खराब हुई सड़कों को लेकर स्थानीय स्तर पर बढ़ती शिकायतों के बीच भजनलाल सरकार ने पैच रिपेयर का अभियान मिशन मोड में चलाने के निर्देश दिए हैं। सरकार का दावा है कि सर्वे और नियमित गश्त के दौरान जैसे ही सड़क पर गड्ढे की पहचान होगी, 48 से 72 घंटे के भीतर उसकी मरम्मत कराई जाएगी।
निकाय चुनाव से पहले सरकार की यह कवायद राजनीतिक तौर पर भी अहम मानी जा रही है। सड़क, नाली, सफाई और स्ट्रीट लाइट जैसे मुद्दे सीधे वार्ड स्तर के मतदाता से जुड़े होते हैं। ऐसे में सरकार की कोशिश है कि चुनावी मैदान में उतरने से पहले शहरों की सड़कों पर काम जमीन पर दिखाई दे।
309 निकायों में पैच रिपेयर, 166 में काम पूरा
सरकार के मुताबिक प्रदेश के 309 स्थानीय निकायों में सड़कों के पैच रिपेयर के लिए अभियान चलाया जा रहा है। इनमें से 166 निकायों में स्वीकृत कार्य पूरे हो चुके हैं, जबकि 143 निकायों में काम प्रगति पर है। सरकार ने शेष कार्यों को 5 सितंबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है। यानी निकाय चुनाव से पहले स्थानीय निकायों के सामने सड़क मरम्मत के काम को तेजी से पूरा करने की स्पष्ट समयसीमा है। इस अभियान में फिलहाल कुल स्वीकृत कार्यों का 53.7 प्रतिशत पूरा होने का दावा किया गया है।
गड्ढा मिला तो 48 से 72 घंटे में कार्रवाई
मानसून में सबसे बड़ी समस्या यह होती है कि बारिश के बाद सड़क पर बने गड्ढे लगातार बढ़ते जाते हैं। इन्हीं शिकायतों को देखते हुए सरकार ने नियमित गश्त और सर्वे को अभियान का हिस्सा बनाया है। सड़क पर गड्ढे की पहचान होने के बाद 48 से 72 घंटे के भीतर पैच रिपेयर कराने का दावा किया गया है। इसके लिए जरूरत के मुताबिक कोल्ड मिक्स या हॉट मिक्स का इस्तेमाल किया जा रहा है। यानी सरकार की रणनीति सिर्फ बड़ी सड़कों की मरम्मत तक सीमित नहीं है। कोशिश वार्ड स्तर पर उन छोटे-छोटे गड्ढों को भी तेजी से भरने की है, जो रोजाना आम लोगों की परेशानी का कारण बनते हैं।
कोटा सबसे आगे, जयपुर और बीकानेर में भी तेजी
पैच रिपेयर अभियान में कोटा जोन ने शत-प्रतिशत उपलब्धि हासिल करने का दावा किया है। यहां स्वीकृत सभी 28 स्थानीय निकायों में काम पूरा हो चुका है। बीकानेर में 37 में से 35 और जयपुर-द्वितीय में 47 में से 43 स्थानीय निकायों में कार्य पूरा होने की जानकारी सरकार ने दी है। इन आंकड़ों के जरिए सरकार यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि मानसून में सड़क खराब होने की शिकायतों पर सिर्फ कागजी कार्रवाई नहीं, बल्कि मौके पर काम कराया जा रहा है।
सड़क पर काम, मोबाइल में रिकॉर्ड... ‘सुगम पथ’ से निगरानी
सरकार ने सड़क मरम्मत अभियान की निगरानी के लिए डिजिटल व्यवस्था को भी जोड़ा है। ‘सुगम पथ पोर्टल’, जीपीएस फोटो और डिजिटल रिकॉर्ड के जरिए पैच रिपेयर के काम का सत्यापन किया जा रहा है। इससे यह रिकॉर्ड रखा जा रहा है कि किस स्थान पर गड्ढा मिला, वहां कब काम हुआ और उसकी प्रगति क्या रही। सरकार का कहना है कि इससे काम की गुणवत्ता और समयबद्धता के साथ संबंधित ठेकेदारों की जवाबदेही भी तय की जा सकेगी। निकाय चुनाव के लिहाज से यह व्यवस्था इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सड़क मरम्मत को लेकर स्थानीय स्तर पर सवाल उठते रहे हैं। अब सरकार डिजिटल रिकॉर्ड के जरिए काम का हिसाब देने की कोशिश कर रही है।
387 करोड़ की मंजूरी, 175 करोड़ के काम
प्रदेश में कुल 2,12,556 किलोमीटर का सड़क नेटवर्क है। सरकार के मुताबिक इनमें 58,919 किलोमीटर सड़कें मरम्मत योग्य और 55,340 किलोमीटर पेचेबल श्रेणी में हैं। इनके लिए राज्य सरकार ने अब तक 387 करोड़ रुपये की स्वीकृति जारी की है। इसमें से करीब 175 करोड़ रुपये के कार्य पूरे किए जा रहे हैं। शेष राशि का इस्तेमाल प्राथमिकता के आधार पर चिन्हित क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत में किया जा रहा है। इसके अलावा वर्ष 2026-27 में नॉन-पैचेबल सड़कों के लिए 2,055 नए कार्य स्वीकृत किए गए हैं। इनसे 4,529 किलोमीटर सड़क लंबाई को कवर किया जाएगा और इनकी अनुमानित लागत 1,262 करोड़ रुपये है।