फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

राजस्थान: कुर्सी किसकी; मेयर-सभापति के नामांकन में BJP-कांग्रेस के बीच कहां निर्दलीयों ने बदला गणित?

Wed, 16 Sep 2026 05:33 PM IST
Sourabh Bhatt न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर

सार

राजस्थान निकाय चुनाव के बाद मेयर और सभापति पदों के लिए नंबर गेम शुरू हो गया है। कई निकायों में निर्दलीय और बागी पार्षद BJP-कांग्रेस के समीकरण प्रभावित कर सकते हैं।
विज्ञापन
राजस्थान निकाय चुनाव - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

 

 

राजस्थान के 305 नगरीय निकायों में मेयर, सभापति और अध्यक्ष पद के चुनाव की तस्वीर बुधवार को नामांकन प्रक्रिया खत्म होने के साथ काफी हद तक साफ हो गई। दोपहर 3 बजे नामांकन का समय खत्म हुआ। अब 17 सितंबर को नामांकन पत्रों की जांच और 18 सितंबर को दोपहर 3 बजे तक नाम वापसी के बाद अंतिम मुकाबला तय होगा।

मेयर, सभापति और अध्यक्ष पद के लिए मतदान 21 सितंबर को होगा, जबकि उप महापौर और उपाध्यक्ष पद के चुनाव 22 सितंबर को होंगे।

निकाय चुनाव के बाद सामने आए वार्डों के गणित ने भाजपा और कांग्रेस दोनों के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। कई नगर निगम और नगर परिषदों में दोनों दल बहुमत से दूर हैं। ऐसे में निर्दलीय पार्षदों की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। कुछ निकायों में पार्टी के भीतर की नाराजगी और बागियों ने भी मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है।

अजमेर में कांग्रेस का चौंकाने वाला दांव

अजमेर नगर निगम में मेयर पद के लिए कांग्रेस ने किरण गढ़वाल को मैदान में उतारकर सबको चौंका दिया। यह सीट सामान्य वर्ग की महिला के लिए आरक्षित है। भाजपा ने अनामिका शर्मा को उम्मीदवार बनाया है।

किरण गढ़वाल ओबीसी वर्ग के माली समुदाय से आती हैं। अजमेर में इस समुदाय के करीब 30 हजार मतदाता बताए जाते हैं। अब तक इस समुदाय का झुकाव भाजपा के साथ माना जाता रहा है, लेकिन निकाय चुनाव के नतीजों में समुदाय के एक हिस्से का समर्थन कांग्रेस की ओर जाता दिखाई दिया।

कांग्रेस के पास सामान्य वर्ग की कई महिला पार्षद होने के बावजूद गढ़वाल को उम्मीदवार बनाए जाने को इसी सामाजिक समीकरण से जोड़कर देखा जा रहा है।

भाजपा और कांग्रेस दोनों ही निर्दलीय पार्षदों के समर्थन से बोर्ड बनाने का दावा कर रहे हैं। ऐसे में अजमेर में मेयर चुनाव सिर्फ दो उम्मीदवारों का मुकाबला नहीं, बल्कि समर्थन जुटाने का भी खेल बन गया है।

विज्ञापन


यह भी पढें- राजस्थान निकाय चुनाव: भरतपुर में बहुमत से दूर, फिर भी बोर्ड बनाने की तैयारी में BJP; अनुराधा सिंह होंगी चेहरा

भरतपुर में 36 निर्दलीयों के हाथ में मेयर की चाबी

भरतपुर नगर निगम में भी मेयर की कुर्सी का फैसला निर्दलीय पार्षदों के रुख पर निर्भर करेगा। वार्ड 17 की निर्दलीय पार्षद विचित्रा सिंह और वार्ड 61 की भाजपा पार्षद अनुराधा सिंह ने नामांकन दाखिल किया है।

65 वार्ड वाले निगम में भाजपा के 20, कांग्रेस के सात और निर्दलीयों के 36 पार्षद हैं। बसपा और आरएलपी के खाते में एक-एक सीट है। बहुमत के लिए 33 पार्षद चाहिए।

विचित्रा सिंह ने नामांकन के बाद कांग्रेस के समर्थन का दावा किया है और कहा कि उनका खेमा बोर्ड बनाने की स्थिति में है। दूसरी ओर भाजपा भी अपने पास जरूरी समर्थन होने का दावा कर रही है। यानी भरतपुर में सबसे बड़ी पार्टी भाजपा है, लेकिन मेयर की कुर्सी तक पहुंचने के लिए उसे निर्दलीयों का साथ जरूरी होगा।

भीलवाड़ा में BJP को बहुमत, कांग्रेस मैदान से बाहर

भीलवाड़ा में तस्वीर बाकी निगमों से अलग है। यहां भाजपा ने वार्ड 9 की पार्षद जसवंत कंवर को मेयर पद का उम्मीदवार बनाया है। 70 वार्ड वाले निगम में भाजपा के पास 45 सीटें हैं, इसलिए उसके पास स्पष्ट बहुमत है। जसवंत कंवर 37 वर्ष की हैं और वार्ड 9 से निर्दलीय प्रत्याशी को 2,165 वोट से हराकर पार्षद बनी हैं।

कांग्रेस ने मेयर चुनाव में पार्टी के सिंबल पर उम्मीदवार नहीं उतारने का फैसला किया है। कांग्रेस शहर अध्यक्ष शिवराम खटीक के अनुसार राज्य कांग्रेस नेतृत्व के निर्देश के बाद यह निर्णय लिया गया।

बीकानेर में कांग्रेस की जीत के बावजूद बागी ने बढ़ाई चुनौती

बीकानेर नगर निगम में कांग्रेस ने पूर्व मंत्री बीडी कल्ला के भतीजे और वार्ड 73 के पार्षद अनिल कल्ला को मेयर पद का उम्मीदवार बनाया है। कांग्रेस ने 80 में से 42 वार्ड जीते हैं और उसके पास बहुमत है। भाजपा ने वार्ड 13 के पार्षद सुरेंद्र सिंह को मैदान में उतारा है, जबकि पार्टी के पास बहुमत नहीं है।

इसी बीच कांग्रेस से टिकट नहीं मिलने के बाद बागी हुए नवरतन डागा ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर नामांकन दाखिल कर दिया। डागा ने टिकट वितरण में कल्ला परिवार को बार-बार प्राथमिकता दिए जाने पर सवाल उठाया है। इससे कांग्रेस के सामने अपने बहुमत को एकजुट रखने की चुनौती भी सामने आई है।

पाली में बहुमत से दोनों दल दूर

पाली नगर निगम में भी मेयर की कुर्सी का फैसला आसान नहीं है। कांग्रेस ने सुमित्रा जैन और भाजपा ने नमिता बुंबकिया को उम्मीदवार बनाया है। 65 सदस्यीय निगम में कांग्रेस के 29, भाजपा के 21 और निर्दलीयों के 15 पार्षद हैं। बहुमत के लिए 33 पार्षद चाहिए। यानी दोनों प्रमुख दलों को बहुमत के लिए निर्दलीयों का समर्थन जुटाना होगा।

अलवर में आमने-सामने BJP-कांग्रेस और निर्दलीय

अलवर नगर निगम में मुकाबला तीन तरफा हो गया है। भाजपा ने वार्ड 7 की सुमनलता अग्रवाल, कांग्रेस ने वार्ड 39 की कमलेश शर्मा और निर्दलीय रिंकल गर्ग ने मेयर पद के लिए नामांकन दाखिल किया है। सुमनलता अग्रवाल पूर्व नगर परिषद सभापति अजय अग्रवाल की पत्नी हैं, जबकि कमलेश शर्मा पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष योगेश मिश्रा की पत्नी हैं। यहां निर्दलीय उम्मीदवार की मौजूदगी ने मुकाबले को अलग आयाम दे दिया है।

उदयपुर में BJP के पास बहुमत

उदयपुर में भाजपा ने पारस सिंघवी और कांग्रेस ने डॉ. पूनम कंवर को उम्मीदवार बनाया है। निगम में भाजपा के पास बहुमत है। इसके बावजूद मेयर चुनाव की औपचारिक प्रक्रिया 21 सितंबर को मतदान के साथ पूरी होगी।

बारां में AAP के सामने BJP-कांग्रेस

बारां नगर परिषद का गणित भी राज्य के दूसरे निकायों से अलग है। 60 वार्डों में आम आदमी पार्टी ने 31 सीटें जीती हैं और बहुमत हासिल किया है। कांग्रेस के 18, भाजपा के नौ और निर्दलीयों के दो पार्षद हैं। AAP ने शीतल राठौड़ को सभापति पद का उम्मीदवार बनाया है। भाजपा ने निलेश जैन और कांग्रेस ने मीनाक्षी भारद्वाज को मैदान में उतारा है। यहां AAP के पास स्पष्ट बहुमत होने के कारण बोर्ड गठन का गणित उसके पक्ष में है।

जैसलमेर में BJP के सामने कांग्रेस के दो दावेदार

जैसलमेर में भाजपा के पास 45 में से 25 वार्ड हैं। कांग्रेस ने 16 और निर्दलीयों ने चार सीटें जीती हैं। भाजपा ने अरुण कुमार पुरोहित और विजय डांगरा के नामांकन दाखिल किए हैं। कांग्रेस ने पहले निर्मल रायानी और बाद में पूर्व परिषद सभापति अशोक सिंह तंवर का भी नामांकन दाखिल किया। तंवर वार्ड 20 से जीते हैं। नाम वापसी के बाद यहां अंतिम मुकाबले की तस्वीर साफ होगी।

झुंझुनूं और दौसा में भी निर्दलीय अहम

झुंझुनूं के 60 वार्डों में कांग्रेस के 30, भाजपा के 15 और निर्दलीयों के 15 पार्षद हैं। कांग्रेस ने अब्दुल्ला अगवान और भाजपा ने मनु धनखड़ को मैदान में उतारा है। दौसा में 55 सदस्यीय परिषद में कांग्रेस के 24, भाजपा के 17 और निर्दलीयों के 14 पार्षद हैं। यहां OBC महिला के लिए आरक्षित पद पर भाजपा ने वार्ड 6 की कविता गुर्जर और कांग्रेस ने वार्ड 54 की रेखा गुर्जर को उम्मीदवार बनाया है। दोनों जगह निर्दलीय पार्षद बोर्ड गठन के समीकरण में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

कुछ निकायों में तस्वीर पहले ही साफ

कोटकासिम नगरपालिका में भाजपा की रेखा सैनी निर्विरोध अध्यक्ष चुनी जा चुकी हैं। वहीं सवाई माधोपुर में कांग्रेस के शैलेंद्र चौधरी और भाजपा की मेवा चौधरी के बीच सीधा मुकाबला है।बांसवाड़ा में भाजपा ने मुकेश रावत, सीकर में कांग्रेस ने खतीजा बानो और भाजपा ने कंचन खड़ोलिया, जबकि नागौर में भाजपा ने संतोष टाक और कांग्रेस ने दीपक सैनी को मैदान में उतारा है।

 

विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें