राजस्थान बीजेपी की प्रदेश इकाई एक अगस्त को होने वाले महा जनघेराव में कोई भी कोर कसर बाकी छोड़ने के मूड में नहीं है। राजस्थान विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी द्वारा शुरू किया गया आखिरी जनआंदोलन हो सकता है। 'नहीं सहेगा राजस्थान' को लेकर बीजेपी की प्रदेश इकाई से लेकर केंद्रीय नेतृत्व तक सक्रिय है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने सीकर के भाषण में नहीं सहेगा राजस्थान का आव्हान कर चुके हैं। दरअसल, प्रधानमंत्री के सीकर दौरे के बाद इस जन आंदोलन में एक नई ऊर्जा आ गई है।
बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने भी नहीं सहेगा राजस्थान का आव्हान किया। इतना ही नहीं पिछले दो दिन से निरंतर इस विषय पर प्रेस वार्ता आयोजित की जा रही है। सभी सांसद अपने क्षेत्र में प्रेस और आमजन दोनों से संपर्क साधकर चलो जयपुर का नारा देते नजर आ रहे हैं। पिछले सभी आंदोलन के दौरान बीजेपी भीड़ जुटाने में नाकाम साबित रही थी। सतीश पूनिया के समय आयोजित जन आक्रोश यात्रा बीजेपी की चार साल की सबसे कमजोर यात्रा रही, जिसके चलते कांग्रेस ने बीजेपी को जमकर घेरा।
इतना ही नहीं सीपी जोशी के नेतृत्व में सचिवालय घेराव में भी कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह गोटसरा ने प्रेस को बुलाकर खाली कुर्सियों के 45 सेकेंड का वीडियो दिखाया था, जिसमें बीजेपी की जबरदस्त किरकिरी हुई थी। महिला विरोध के कार्यक्रम में आंदोलन प्रभारी दीया कुमारी को आखिरी पलो में अपने स्टाफ और उनके जानकारों की भीड़ जुटाकर अपने कार्यक्रम को बचाया था। पिछले चार साल छह महीने में गुटबाजी, एक दूसरे को निपटाने की राजनीति खूब दिखाई दी पर भीड़ कहीं नहीं दिखी। इस सबसे शिक्षा लेते हुए और प्रधानमंत्री की पैनी नजर होने के चलते बीजेपी प्रदेश इकाई कोई भी लापरवाही बर्दास्त करने की स्थिति में नहीं है।
सूत्रों के अनुसार, किसी की सलाह पर मंच का स्थान भी बदल दिया गया है, जो मंच पहले बीजेपी मुख्यालय के गेट पर होता था, उसको बीजेपी कार्यालय से बाएं हाथ 200 मीटर खिसका दिया गया है। जानकर बता रहे हैं कि कुर्सियों की संख्या भी दोगुनी रखी गई है। क्योंकि कुर्सी होगी नहीं तो लोग क्यों आएंगे। जो करना है वो बीजेपी करने को तैयार है, बस इस बार से भीड़ की शुरुआत हो जाए। प्रेस वार्ता में प्रदेश अध्यक्ष सीपी जोशी के तनाव को अमर उजाला का यह सवाल की बीजेपी किसी वास्तु का सहारा ले रही है? हंसी के माध्यम से थोड़ी रहत दे गया, परंतु यह चिंता बरकरार है कि कल का आलम क्या होगा।