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Rajasthan: गहलोत सरकार में बने नौ जिले और तीन संभाग खत्म, जानें भजनलाल कैबिनेट के अहम फैसले

Sat, 28 Dec 2024 05:01 PM IST
अरविंद कुमार न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर

सार

राइजिंग राजस्थान और सरकार की पहली वर्षगांठ के बाद भजनलाल सरकार ने सीएमओ में शनिवार को कैबिनेट और मंत्री परिषद की बैठक आयोजित की। इस बैठक में भजनलाल सरकार ने कई बड़े फैसले लिए।
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अशोक गहलोत और भजनलाल शर्मा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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भजनलाल कैबिनेट ने शनिवार को बड़ा निर्णय लेते हुए गहलोत सरकार में नवगठित जिलों में से नौ जिले और तीन संभाग खत्म कर दिया है। इस निर्णय के बाद राजस्थान में कुल जिलों की संख्या 50 से घटकर 41 रह गई है। यह निर्णय वित्तीय संसाधनों के उचित उपयोग और जनसंख्या के संतुलन को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
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कैबिनेट मंत्री जोगाराम पटेल ने बताया कि नए जिलों और संभागों के गठन में कई व्यवहारिक समस्याएं थीं। जैसे कि पर्याप्त तहसीलें न होना, पद सृजन और कार्यालयों की व्यवस्था की कमी। समीक्षा समिति ने इन जिलों की उपयोगिता को लेकर स्पष्ट निष्कर्ष निकाला, जिससे यह निर्णय लिया गया।

ये जिले रहेंगे
बालोतरा, ब्यावर, डीग, डीडवाना-कुचामन, कोटपूतली-बहरोड, खैरथल-तिजारा, फलौदी और सलूंबर।

इन जिलों की मान्यता खत्म
दूदू, केकड़ी, शाहपुरा, नीमकाथाना, गंगापुरसिटी, जयपुर ग्रामीण, जोधपुर ग्रामीण, अनूपगढ़ और सांचौर।

इन संभागों की मान्यता खत्म
सीकर, पाली और बांसवाड़ा संभाग को खत्म किया गया।

कैबिनेट मंत्री जोगाराम पटेल ने बताया, समान पात्रता परीक्षा (सीईटी) के स्कोर को तीन साल तक मान्य रखने का फैसला भी सराहनीय है। यह छात्रों को राहत देगा और प्रशासनिक परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए अधिक अवसर प्रदान करेगा। साथ ही, खाद्य सुरक्षा योजना में नए लाभार्थियों को जोड़ने का अभियान समाज के वंचित वर्गों के लिए सकारात्मक कदम है।
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जोगाराम पटेल बोले, गहलोत शासन के दौरान नए जिलों और संभागों के गठन को लेकर उठाए गए कदमों की आलोचना भी स्वाभाविक है। इन इकाइयों को बिना समुचित योजना और संसाधनों के गठन करना प्रशासनिक अक्षमता को दर्शाता है। समीक्षा समिति के निष्कर्ष बताते हैं कि नए जिलों की घोषणा राजनीतिक लाभ के लिए की गई थी, न कि जनता के दीर्घकालिक हितों को ध्यान में रखकर। भजनलाल सरकार द्वारा इन जिलों को समाप्त करना उचित हो सकता है। लेकिन इससे उन क्षेत्रों में जनता के बीच असंतोष भी उत्पन्न हो सकता है, जो नए जिलों के गठन से लाभान्वित होने की उम्मीद कर रहे थे। यह निर्णय, हालांकि तर्कसंगत है। इसे लागू करने की प्रक्रिया और समय सीमा को लेकर विवाद उत्पन्न कर सकता है।

मंत्री पटेल बोले, जनगणना रजिस्ट्रार जनरल द्वारा एक जनवरी से सीमाओं को फ्रिज करने के कारण सरकार पर 31 दिसंबर तक निर्णय लेने का दबाव बना। लेकिन यह एक अल्पकालिक समाधान की तरह प्रतीत होता है। इससे प्रशासनिक प्रक्रिया में तेजी लाई गई, परंतु दीर्घकालिक योजना का अभाव स्पष्ट है। इस निर्णय से यह स्पष्ट होता है कि प्रशासनिक इकाइयों के गठन में गहन योजना, उचित संसाधनों का प्रबंधन और जनता की जरूरतों का विश्लेषण अत्यंत आवश्यक है। भजनलाल सरकार का यह कदम प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक सकारात्मक प्रयास है। लेकिन इसे लागू करने के दौरान जनता की भावनाओं और क्षेत्रीय असंतोष को भी संतुलित करने की आवश्यकता होगी।

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टीकाराम जूली - फोटो : अमर उजाला
टीकाराम जूली का एक्स पर पोस्ट
मीडिया से प्राप्त जानकारी के अनुसार राजस्थान की भाजपा सरकार कैबिनेट बैठक में राजनीतिक प्रतिशोध के कारण कई नए जिलों को समाप्त करना चाहती हैं। राजस्थान देश का सबसे बड़ा राज्य है, और पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने जनता के लिए कम दूरी पर प्रशासनिक कार्य उपलब्ध करवाने के लिए नए जिले बनाए थे। यह कदम लोगों को उनके घरों के निकट प्रशासनिक सुविधाएं प्रदान करने के लिए उठाया गया था, जिससे उन्हें अपने कामों को आसानी से और जल्दी निपटाने में मदद मिली।


राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे जी ने भी मुख्यमंत्री रहते हुए विधानसभा में अपने भाषणों में छोटी और नई प्रशासनिक इकाइयों के पक्ष में बात रखी थी। प्रतापगढ़ जैसा छोटा जिला भाजपा की सरकार के कार्यकाल में ही बना था, जो यह दर्शाता है कि भाजपा भी छोटे जिलों के महत्व को समझती है। नए जिलों से वहां की जनता को जो सहूलियत हुई है, उसे भाजपा सरकार क्यों खत्म करना चाहती है? यह निर्णय लोगों के लिए मुश्किलें पैदा कर सकता है और उनकी दूरी प्रशासनिक केंद्रों से बढ़ा सकता है।

मुख्यमंत्री जी, नए वर्ष की शुरुआत होने वाली है, और यह समय नई सोच और विकास की दिशा में कदम बढ़ाने का है। नए जिलों को खत्म करने से न केवल लोगों को परेशानी होगी, बल्कि यह कदम विकास की दिशा में एक कदम पीछे की ओर भी हो सकता है। इसलिए, मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि आप इस मामले में गहराई से विचार करें और जनता के हित में निर्णय लें।
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