सार
Rajasthan Assembly: राजस्थान विधानसभा में RLD विधायक सुभाष गर्ग के खिलाफ विशेषाधिकार हनन समिति की रिपोर्ट आज पेश होगी। लोहागढ़ किले के मुद्दे पर गलत तथ्य पेश करने के आरोप में बीजेपी ने प्रस्ताव लाया था, जिसका कांग्रेस ने विरोध कर वॉकआउट किया था।
जयंत चौधरी ने सुभाष गर्ग को सौंपी बड़ी जिम्मेदारी
- फोटो : अमर उजाला
राजस्थान विधानसभा में आज राष्ट्रीय लोकदल (RLD) के विधायक डॉ. सुभाष गर्ग के खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव को लेकर विशेषाधिकार हनन समिति अपनी रिपोर्ट सदन में पेश करेगी। विशेषाधिकार हनन समिति के सभापति केसाराम चौधरी इस रिपोर्ट को सदन में रखेंगे। गौरतलब है कि पिछले विधानसभा सत्र में बीजेपी के सचेतक जोगेश्वर गर्ग ने सुभाष गर्ग के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव पेश किया था।
लोहागढ़ मामले में लाया गया था प्रस्ताव
पेश किया गया। यह प्रस्ताव सुभाष गर्ग द्वारा भरतपुर के लोहागढ फोर्ट मामले पर उठाए गए मुद्दे को लेकर लाया गया था। सुभाष गर्ग ने 24 फरवरी 2025 को राजस्थान विधानसभा प्रक्रिया के नियम-50 के अन्तर्गत स्थगन प्रस्ताव के जरिए विधानसभा को बताया था कि भरतपुर विधानसभा क्षेत्र के लोहागढ़ फोर्ट के अन्दर वर्षों से रह रहे 30 हजार गरीब परिवारों को सड़कें चौड़ी करने के नाम पर डराया-धमकाया जा रहा है और उन्हें प्रशासन द्वारा अवैध तरीके से नोटिस दिये जा रहे हैं, जबकि इस फोर्ट के अन्दर व्यापारिक, शैक्षिक, व्यावसायिक और औद्योगिक गतिविधियों को संचालन हो रहा है। बीजेपी इस के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव लाई जिसमें कहा गया कि डॉ. गर्ग ने तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किया और सरकार की छवि को धूमिल करने का प्रयास किया।
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बीजेपी के इस प्रस्ताव का विपक्ष ने जमकर विरोध भी किया था। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा था कि अगर इस तरह के प्रस्ताव सदन में पेश किए जाते रहेंगे, तो कोई विधायक जनता की आवाज उठाने से डर जाएगा। उन्होंने इसे लोकतंत्र की हत्या और सदस्यों की आवाज़ दबाने की कोशिश बताया। इस प्रस्ताव के विरोध में कांग्रेस ने सदन से वॉकआउट भी किया था। बीजेपी के प्रस्ताव पर मीडिया से बात करते हुए सुभाष गर्ग ने कहा था कि उन्होंने केवल लोहागढ़ में प्रशासन द्वारा जारी नोटिसों को उठाया, जिसमें आर्कियोलॉजी विभाग भी शामिल था, ऐसे में उनके तथ्यों में कोई गलत सूचना नहीं है। उन्होंने कहा कि उनके पास इस बात के प्रमाण भी मौजूद हैं।
समिति की रिपोर्ट के बाद क्या:
विधानसभा के विशेषाधिकार नियमों के अनुसार विशेषाधिकार हनन समिति की ओर से सदन में रिपोर्ट पेश किए जाने के बाद सदन में इस प्रस्ताव पर यदि बहस करने की मांग किसी सदस्य द्वारा की जाती है तो स्पीकर उस पर आधा घंटे की बहस की अनुमति दे सकते हैं। विशेषाधिकार हनन समिति को अपनी रिपोर्ट सदन में 6 महीने की समायावधि में पेश करनी होती है। इससे अधिक समय लगता है तो इसके लिए सदन में उन्हें अनुमति लेनी होती है।
एनडीए के घटक दल के विधायक हैं सुभाष गर्ग
काबिले गौर है कि सुभाष गर्ग आरएलडी के विधायक हैं और आरएलडी मौजूदा समय में केंद्र में एनडीए सरकार की घटक दल वाली पार्टी है। आरएलडी के सुप्रीम को जयंत चौधरी केंद्र सरकार में कौशल विकास और उद्यमिता मंत्री के मंत्री भी हैं। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि यह विशेषाधिकार का प्रस्ताव ड्रॉप हो सकता है।