सार
राजस्थान विधानसभा सत्र से पहले हुई सर्वदलीय बैठक में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि विपक्ष द्वारा उठाए गए मुद्दों पर सरकार को जवाब देना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी, “जवाब न मिला तो वही घोड़े वही मैदान।” जूली ने बीजेपी पर सदन को जानबूझकर बाधित करने का आरोप लगाया और कहा कि वे डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने टीएसपी क्षेत्र में ओबीसी आरक्षण और अन्य जनहित के मुद्दों पर विधानसभा में लड़ाई जारी रखने का भी भरोसा दिलाया। जनता की निगाहें विधानसभा पर हैं।
राजस्थान विधानसभा सत्र से पहले हुई सर्वदलीय बैठक में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि विपक्ष द्वारा उठाए गए मुद्दों पर सरकार को जवाब देना चाहिए। जूली ने कहा, “सरकार जवाब चाहे जैसे भी दे, लेकिन जवाब तो दिया जाए।” उन्होंने चेतावनी दी कि अगर जवाब नहीं मिला तो “वही घोड़े वही मैदान” वाली स्थिति पैदा होगी। जूली ने कहा कि प्रदेश का किसान, युवा, गरीब और महिलाएं विधानसभा की हर बात देख रहे हैं और उम्मीद भरी नजरों से सुनते हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष का कैमरे को लेकर मुद्दा भी स्पीकर के सामने रखा गया।
नेता प्रतिपक्ष ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी विधानसभा को जानबूझकर बाधित कर रही है। जूली ने कहा, “पहली बार एक दलित नेता प्रतिपक्ष बना है, और बीजेपी इसे हजम नहीं कर पा रही। मेरी हर कोशिश को कमजोर करने की योजना बन रही है।” उन्होंने कहा कि बीजेपी केवल छवि बनाने के लिए आरोप लगाती है और जनता के सवालों से भागती है। जूली ने स्पष्ट किया कि वे डरने वाले नहीं हैं और विधानसभा में जनता की आवाज़ उठाना जारी रखेंगे।
टीएसपी क्षेत्र में ओबीसी आरक्षण और अन्य जनहित के मुद्दों पर विधायक दल की बैठक में आगे की रणनीति तय की जाएगी। जूली ने कहा कि सर्वदलीय बैठक में सभी मुद्दों के समाधान का आश्वासन दिया गया था, लेकिन यदि सरकार जवाब नहीं देती है, तो परिणाम वही होगा-“वही घोड़े वही मैदान।”
जूली ने कहा कि बीजेपी केवल छवि बनाने के लिए बेवजह आरोप लगाती है कि विपक्ष हंगामा कर रहा है। असल मकसद तो अपना बजट पास कराना है। उन्हें राजस्थान की जनता की कोई परवाह नहीं। हम जनता की आवाज़ उठाते हैं तो उन्हें बुरा लगता है। जानबूझकर ऐसा माहौल बनाया जाता है कि विपक्ष सदन को बाधित कर रहा है। जब जनहित के मुद्दे पर सदन बाधित हुआ, तो कुछ समय के लिए ही हुआ। रात तीन-तीन बजे तक भी सदन चलता है। सरकार की जिम्मेदारी है कि जनता के सवालों का जवाब दे, लेकिन वे इससे भागना चाहते हैं।
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