राजस्थान खेल नीति-2026 को लेकर चर्चा
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राज्य सरकार ने राजस्थान खेल नीति-2026 के नए प्रारूप को अंतिम रूप देने के लिए मंगलवार को खेल संघों के प्रतिनिधियों, अर्जुन पुरस्कार विजेताओं और द्रोणाचार्य पुरस्कार विजेताओं के साथ संवाद किया। केंद्र सरकार की 'खेलो भारत नीति-2025' की तर्ज पर तैयार इस प्रारूप पर खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों तथा विभिन्न हितधारकों से सुझाव मांगे गए हैं। इस दौरान राज्य में खेल प्रबंधन और प्रशासन में व्यापक सुधार लाने के लिए पृथक खेल निदेशालय गठित करने के प्रस्ताव पर मुख्य रूप से विचार-विमर्श हुआ।
बुनियादी ढांचे और कोच की कमी पर मंथन
बैठक के दौरान राजस्थान ओलंपिक संघ के अध्यक्ष तेजस्वी गहलोत ने कहा कि प्रदेश में खेल ढांचे को मजबूत करने के लिए प्रशिक्षकों की कमी दूर करना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि विद्यालय स्तर पर कोच उपलब्ध हैं, लेकिन स्पोर्ट्स काउंसिल में इनकी भारी कमी है। इसके लिए उन्होंने शिक्षा विभाग और खेल विभाग के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने का सुझाव दिया। राजस्थान तैराकी संघ के अध्यक्ष अनिल व्यास ने कहा कि पूर्व से तैयार खेल अवसंरचना का उपयोग खिलाड़ियों के हित में नहीं हो रहा है, क्योंकि उसे ठेके पर दे दिया गया है। इससे तैयार संसाधनों का लाभ खिलाड़ियों के स्थान पर ठेकेदार उठा रहे हैं।
प्रतिभा खोज और खेल प्राथमिकताओं का निर्धारण
राजस्थान राज्य खेल परिषद के सचिव राजकेश मीणा ने बताया कि इस बैठक का मुख्य ध्येय सभी हितधारकों के सुझावों को शामिल करके नीति को अधिक प्रभावी बनाना है। योजना के अनुसार, आठ से 14 वर्ष के बच्चों की खेल प्रतिभा को पहचान कर उन्हें जमीनी स्तर से लेकर जिला और राज्य स्तर तक तराशा जाएगा। इसके अतिरिक्त 'एक जिला-एक खेल' योजना के अंतर्गत 30 खिलाड़ियों को एनआईएस कोचों के माध्यम से विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। बैठक में तीन स्तरीय व्यवस्था के तहत 12 खेलों को प्राथमिकता देने पर विचार हुआ, जिसमें टीयर-ए वर्ग में तीरंदाजी, शूटिंग, एथलेटिक्स तथा कुश्ती को शामिल किया गया है।
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डिजिटल रिकॉर्ड और नई खेल अकादमियों का प्रावधान
प्रस्तावित खेल नीति में जयपुर स्थित एसएमएस स्टेडियम में स्पोर्ट्स साइंस सेंटर की स्थापना और संभाग स्तरों पर सैटेलाइट डायग्नोस्टिक सेल बनाने का प्रावधान शामिल किया गया है। खिलाड़ियों के समस्त रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के लिए 'खेल मित्र डिजिटल सिस्टम' विकसित किया जाएगा, जिसके माध्यम से प्रत्येक खिलाड़ी की एक आईडी बनेगी। इसके साथ ही खेल संघों में 25 प्रतिशत पद पूर्व राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों के लिए आरक्षित रहेंगे। खेल अकादमियों में 30 प्रतिशत कोचिंग पद महिला प्रशिक्षकों को देने का प्रस्ताव है। इसके अलावा जयपुर और जोधपुर में पैरा स्पोर्ट्स एक्सीलेंस एकेडमी स्थापित की जाएगी।