Rajasthan: ज्ञानदेव आहूजा ने शुद्धिकरण के पीछे तर्क देते हुए कहा कि मंदिर में उन लोगों को प्रवेश मिला, जिनकी नीयत और निष्ठा भगवान राम में नहीं, बल्कि राजनीतिक स्वार्थ में है। उन्होंने बिल्डर हर्ष त्रेहान और अशोक सैनी पर तुष्टिकरण की राजनीति का आरोप लगाते हुए कटाक्ष किया।
राजधानी जयपुर के शालीमार इलाके में बने राममंदिर में हुए उद्घाटन समारोह ने राजनीतिक घमासान खड़ा कर दिया है। भाजपा के पूर्व विधायक और अपने विवादित बयानों के लिए मशहूर ज्ञानदेव आहूजा ने मंदिर में कांग्रेस नेताओं की मौजूदगी पर आपत्ति जताते हुए पूरे मंदिर परिसर का गंगाजल से ‘शुद्धिकरण’ करवाया। यही नहीं, उन्होंने अपने 30 बीघा में फैले आवास का भी शुद्धिकरण कराया।
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ज्ञानदेव आहूजा ने शुद्धिकरण के पीछे तर्क देते हुए कहा कि मंदिर में उन लोगों को प्रवेश मिला, जिनकी नीयत और निष्ठा भगवान राम में नहीं, बल्कि राजनीतिक स्वार्थ में है। उन्होंने बिल्डर हर्ष त्रेहान और अशोक सैनी पर तुष्टिकरण की राजनीति का आरोप लगाते हुए कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि 'सबको खुश रखने की चाह में तो वेश्या भी बांझ हो गई थी।' इस बयान के बाद से राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया देखी जा रही है।
दलित नेता का तीखा पलटवार
इस बयान पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने तीखा पलटवार किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए भाजपा पर दलित विरोधी मानसिकता का आरोप लगाया। जूली ने लिखा कि भाजपा के वरिष्ठ नेता श्री ज्ञानदेव आहूजा का बयान दलितों के प्रति भाजपा की घृणित मानसिकता का परिचायक है। मैं एक दलित हूं और मैंने विधानसभा में अस्पृश्यता के खिलाफ आवाज उठाई है। क्या भाजपा दलितों को पूजा पाठ करते नहीं देख सकती? क्या भगवान पर अब सिर्फ भाजपा नेताओं का अधिकार रह गया है? उन्होंने मुख्यमंत्री और भाजपा प्रदेशाध्यक्ष से इस पूरे मामले पर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।