विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर बहस के दौरान नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सरकार और मुख्यमंत्री पर तीखा हमला बोला। जूली का भाषण आक्रामक, व्यंग्यात्मक और आरोपों से भरा रहा, जिसमें उन्होंने सरकार की नीतियों, कामकाज और दावों पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने महाभारत के शांति पर्व का उल्लेख करते हुए कहा कि भीष्म ने युधिष्ठिर को राजधर्म का उपदेश देते हुए स्पष्ट कहा था कि झूठ और असत्य के आधार पर न तो राज्य चलता है, न सुख मिलता है और न ही यश। जो राजा झूठ बोलता है, उसकी प्रजा अंततः उसे त्याग देती है।
'सरकार को अपने वादे याद नहीं'
नेता प्रतिपक्ष ने सरकार के संकल्प पत्र पर सवाल उठाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री और सरकार दावा कर रहे हैं कि संकल्प पत्र के 72 प्रतिशत वादे पूरे हो गए हैं, लेकिन सरकार यह नहीं बता पा रही कि कुल कितने वादे थे। जूली ने कहा कि संकल्प पत्र के 9 खंडों में कुल 122 वादे किए गए थे। यदि 72 प्रतिशत पूरे हो चुके हैं, तो शेष 28 प्रतिशत का क्या हुआ? उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार आंकड़ों और दावों के जरिए जनता को भ्रमित कर रही है।
'रील में चल रही सरकार रियल में नहीं'
जूली ने मौजूदा सरकार को 'रील सरकार' करार देते हुए कहा कि शासन आज सोशल मीडिया रील और प्रचार तक सीमित हो गया है। देर रात सचिवालय से निकलते मुख्यमंत्री की रील बनाई जाती है और इसके लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी काम दिखाई नहीं देते।
'चार-चार महीने तक नहीं होती कैबिनेट बैठक'
नेता प्रतिपक्ष ने कैबिनेट बैठकों में देरी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि चार-चार महीने तक कैबिनेट बैठक नहीं होती, लेकिन बड़े उद्योगपतियों के आने पर अगले ही दिन कैबिनेट बुला ली जाती है। उन्होंने विधायकों की बैठकों का जिक्र करते हुए कहा कि कई विधायक अपने ही मंत्री के कारण गांवों में जाने से डर रहे हैं।
सच दिखाने पर अखबार के विज्ञापन बंद
जूली ने आरोप लगाया कि मंत्रियों को जिलों में उपलब्धियां गिनाने भेजा गया, लेकिन वे कोई ठोस उपलब्धि नहीं बता पाए। उन्होंने कहा कि यदि कोई पत्रकार या अखबार सरकार की सच्चाई उजागर करता है, तो सीएमओ और अधिकारियों की ओर से खबर 'ठीक' करने का दबाव बनाया जाता है। कुछ अखबारों के विज्ञापन भी बंद कर दिए जाते हैं। जनसुनवाई को लेकर जूली ने कहा कि मुख्यमंत्री ने जनसुनवाई शुरू करने की घोषणा की थी, लेकिन पूरे साल में कितनी जनसुनवाई हुई, यह सरकार बताए। उन्होंने कहा कि अब जनसुनवाई भाजपा कार्यालय में हो रही है, जबकि गरीब और जरूरतमंद व्यक्ति न्याय के लिए भटक रहा है।
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कानून व्यवस्था पर सरकार को घेरा
उन्होंने सरकार की घोषणाओं और उनके अमल पर भी सवाल उठाए। जूली ने कहा कि विधायकों के वेतन बढ़ाने, आरजीएचएस, छात्रवृत्ति, आवास योजनाओं और सहकार मार्ग फ्लाईओवर जैसी घोषणाओं पर अब तक कोई ठोस प्रगति नहीं हुई। उन्होंने दावा किया कि 75 साल के इतिहास में पहली बार ऐसा हो रहा है कि सरकार ने सभी कामों के लिए एक भी ठोस आदेश जारी नहीं किया। कानून-व्यवस्था पर जूली ने सवाई माधोपुर की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि एक महिला की हत्या कर उसके पैर काट लिए गए, जो प्रदेश की भयावह कानून-व्यवस्था को दर्शाता है। उन्होंने आदिवासियों की जमीन हड़पने, प्रशासनिक अधिकारियों की मनमानी और मंत्रियों से जुड़े विवादों का भी उल्लेख किया।