राजस्थान के तीन चेहरे पद्मश्री से होंगे सम्मानित।
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गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राजस्थान के तीन महान व्यक्तित्वों को पद्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इनमें राजस्थान की लोकगायिका बेगम बतूल और जोधपुर के प्रतिष्ठित उर्दू शायर शीन काफ निज़ाम को पद्मश्री सम्मान दिए जाने की घोषणा हुई है। इनके साथ राजस्थान के आध्यात्मिक गुरु बैजनाथ महाराज को पद्मश्री से सम्मानित किए जाने की घोषणा हुई है।
राजस्थान की लोकगायिका बेगम बतूल
भगवान राम और गणपति के भजन गाने वाली जयपुर की मांड गायिका बेगम को गणतंत्र दिवस पर पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। इससे पहले पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 2022 में उन्हें नारी शक्ति पुरस्कार से भी सम्मानित किया था। बेतूल बेगम मुस्लिम धर्म से ताल्लुक रखती हैं और लंबे समय से भगवान राम और गणपति के भजन गाती आ रही हैं। लोकगायिका भजन के साथ-साथ मुस्लिम मांड भी गाती हैं। दुनिया भर में उनके चाहने वाले हैं। कई बार उन्होंने विदेशी धरती पर भारत की शान बढ़ाई है। उन्होंने पेरिस के प्रसिद्ध टाउन हाल पर भी अपनी प्रस्तुति दी थी।
शीन काफ निजाम
इनका मूल नाम शिव किसन बिसवा है। वर्ष 2010 में इन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है। ये मूल रूप से उर्दू साहित्य से जुड़े हैं। कविताएं और शायरियां लिखते हैं। राजस्थान के जोधपुर में इनका जन्म हुआ था। ये उर्दू को बढ़ावा देने के लिए भी काम करते हैं। इनकी एक मशहूर गजल की कुछ लाइनें इस तरह हैं- 'सफ़र में भी सहूलत चाहती है... मुहब्बत अब मुरव्वत चाहती है... तुम्हारा शौक है, ख्वाहिश भी होगी मगर तखलीक हैरत चाहती है'
बैजनाथ महाराज
राजस्थान के सबसे प्रसिद्ध हिल स्टेशन माउंट आबू में श्रद्धानाथ जी आश्रम के पीठाधीश्वर बैजनाथ महाराज को भी पद्मश्री देने का एलान किया गया है। वे यहां माउंट आबू में शिव साधना आश्रम चलाते हैं। आश्रम के आस-पास रहने वाले लोगों की सेवा के लिए भी समर्पित हैं। आश्रम से लोगों को फ्री अनाज और वस्त्र आदि वितरित किए जाते हैं। बैजनाथ जी महाराज ने अपने गुरु श्रद्धानाथ महाराज की विरासत को संरक्षित ही नहीं किया वरन् अधिक समृद्ध एवं प्रशस्त किया। अपनी कर्मयोगी प्रकृति एवं संक्रियता के स्वभाव से उन्होंने अनेक स्थायी महत्व के कार्य करते हुए माउन्ट आबू में ‘शिव साधना आश्रम’ के रूप में नाथ सम्प्रदाय की पीठ की स्थापना की।