नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि राजस्थान कैडर की अन्य सेवाओं से भारतीय प्रशासनिक सेवा में नवचयनित सभी अधिकारियों को वे हार्दिक बधाई देते हैं और उनके उज्ज्वल कार्यकाल की शुभकामनाएं भी देते हैं। लेकिन इसके साथ ही उन्होंने सवाल खड़ा किया कि भाजपा सरकार ने इस चयन प्रक्रिया में दलित, पिछड़े, आदिवासी और अल्पसंख्यक समुदाय से किसी भी अधिकारी को क्यों शामिल नहीं किया?
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उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस के समय में जब अन्य सेवाओं से आईएएस बनाने की प्रक्रिया शुरू हुई थी, तब समाज के सभी वर्गों सामान्य, दलित, पिछड़े और आदिवासी को समान अवसर दिया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा केवल चुनाव के समय जुमलेबाजी करके वोट लेती है, लेकिन उच्च पदों पर प्रतिनिधित्व देने में पिछड़े, दलित और आदिवासी वर्ग की उपेक्षा करती है। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस और उनके नेता राहुल गांधी इन वंचित वर्गों को उचित प्रतिनिधित्व दिलाने के लिए लगातार संघर्ष कर रहे हैं। जूली ने दावा किया कि सामाजिक न्याय केवल कांग्रेस ही सुनिश्चित कर सकती है।
गौरतलब है कि सोमवार को प्रदेश को अन्य सेवाओं से चार नए आईएएस मिले। इनमें नितीश कुमार शर्मा, नरेश कुमार गोयल, अमिता शर्मा और नरेंद्र कुमार मंघानी के नाम शामिल हैं। हालांकि 13 सेवाओं के 35 अफसरों ने इसके लिए आवेदन किया था। कृषि, कृषि विपणन, हेल्थ, कॉलेज शिक्षा से लेकर सहकारिता जैसी सेवा के अफसर रह गए और 3 दूसरी सेवाओं के 4 अफसर आईएएस बन गए। सांख्यिकी सेवा से नरेंद्र मंगानी और नीतीश शर्मा हैं। लेखा सेवा से अमिता शर्मा और बीमा सेवा से नरेश कुमार गोयल आईएएस बने हैं। ये चारों अधिकारी सामान्य वर्ग से आते हैं। इसलिए राजस्थान में अब इनके चयन को लेकर सियासी बवाल मच गया है।