सार
जयपुर नगर निगम के वार्ड 76 में भाजपा प्रत्याशी को लेकर विवाद सामने आया है। विधायक कालीचरण सराफ ने कुलदीप मिश्रा को सिंबल दिया, जबकि प्रदेश नेतृत्व ने पुनीत कर्णावट को अधिकृत प्रत्याशी बनाया। दोनों ने नामांकन दाखिल किया, जिससे पार्टी के सामने स्थिति पेचीदा हो गई।
जयपुर नगर निगम चुनाव में वार्ड 76 से भाजपा प्रत्याशी को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। पार्टी की ओर से पूर्व डिप्टी मेयर पुनीत कर्णावट को प्रत्याशी बनाए जाने के बावजूद मालवीय नगर विधायक कालीचरण सराफ ने दूसरे दावेदार कुलदीप मिश्रा को भाजपा का अधिकृत सिंबल दे दिया। इसके बाद कुलदीप मिश्रा ने भाजपा प्रत्याशी के तौर पर नामांकन दाखिल कर दिया। मामला प्रदेश नेतृत्व तक पहुंचने के बाद पार्टी को हस्तक्षेप करना पड़ा।
जानकारी के अनुसार, भाजपा ने वार्ड 76 से पुनीत कर्णावट को अपना अधिकृत प्रत्याशी तय किया था। इससे पहले पार्टी स्तर पर कुलदीप मिश्रा के नाम पर भी चर्चा हुई थी, लेकिन बाद में पार्टी ने पुनीत कर्णावट को टिकट देने का निर्णय लिया।
इसी बीच, विधायक कालीचरण सराफ ने कुलदीप मिश्रा को भाजपा का सिंबल दे दिया। बताया जा रहा है कि भाजपा की ओर से कालीचरण सराफ को 27 अगस्त की तारीख का पावर ऑफ अटॉर्नी दिया गया था। इसी के आधार पर उन्हें पार्टी प्रत्याशी को सिंबल देने का अधिकार मिला था। विधायक ने इसी अधिकार के तहत कुलदीप मिश्रा को सिंबल जारी कर दिया।
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मामले की जानकारी भाजपा प्रदेश नेतृत्व तक पहुंची तो पार्टी स्तर पर तत्काल सक्रियता दिखाई गई। इसके बाद 31 अगस्त की तारीख में नया सिंबल और पावर ऑफ अटॉर्नी पत्र जारी किया गया। इस नए दस्तावेज के आधार पर पार्टी के घोषित प्रत्याशी पुनीत कर्णावट ने अपना नामांकन दाखिल किया।
पूरे घटनाक्रम पर विधायक कालीचरण सराफ ने सफाई देते हुए कहा कि पार्टी ने पहले कुलदीप मिश्रा का नाम तय किया था। बाद में पार्टी ने प्रत्याशी बदलकर पुनीत कर्णावट को टिकट दे दिया। उनका कहना है कि प्रत्याशी बदले जाने से पहले ही उन्होंने कुलदीप मिश्रा को पार्टी का सिंबल दे दिया था।
अब वार्ड 76 में एक ही पार्टी के दो प्रत्याशियों के नामांकन दाखिल होने से स्थिति पेचीदा हो गई है। एक तरफ कुलदीप मिश्रा के पास विधायक कालीचरण सराफ की ओर से दिया गया भाजपा सिंबल है, वहीं दूसरी तरफ पुनीत कर्णावट को प्रदेश नेतृत्व की ओर से 31 अगस्त की तारीख में नया सिंबल और पावर ऑफ अटॉर्नी जारी किया गया है। ऐसे में अब यह देखना होगा कि चुनाव प्रक्रिया में भाजपा का अधिकृत प्रत्याशी किसे माना जाता है।