राजस्थान सरकार ने Rajasthan Government Health Scheme (RGHS) में अनियमितताओं के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए सात चिकित्सकों को निलंबित कर दिया है। साथ ही एक निजी अस्पताल और एक डायग्नोस्टिक सेंटर के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं। इससे पहले भी योजना में गड़बड़ियों पर 19 एफआईआर, 64 कार्मिकों का निलंबन और करीब 39 करोड़ रुपये की रिकवरी की जा चुकी है।
प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने बताया कि ऑडिट के दौरान अनियमितताएं सामने आने पर सीकर जिले में पदस्थापित सात डॉक्टरों को निलंबित किया गया है। इनमें मेडिकल कॉलेज सीकर के डॉ. कमल कुमार अग्रवाल, डॉ. सुनील कुमार ढाका, डॉ. मुकेश वर्मा सहित अन्य चिकित्सक शामिल हैं। भरतपुर के एक नर्सिंग होम और बीकानेर के एक डायग्नोस्टिक सेंटर के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की जा रही है। राजस्थान स्टेट हेल्थ एश्योरेंस एजेंसी के सीईओ हरजीलाल अटल के अनुसार जांच में सामने आया कि अस्पताल और फार्मेसी की मिलीभगत से लाभार्थियों के RGHS कार्ड का दुरुपयोग कर फर्जी बिल बनाकर भुगतान लेने की कोशिश की गई, जिससे राजकोष को नुकसान पहुंचा।
लाभार्थियों के कार्ड का दुरूपयोग कर उठाए फर्जी क्लेम
राजस्थान स्टेट हेल्थ एश्योरेंस एजेंसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हरजीलाल अटल ने बताया कि जांच रिपोर्ट में यह तथ्य गंभीर रूप से उजागर हुआ है कि भरतपुर स्थित कशिश फार्मेसी एवं भरतपुर नर्सिंग होम द्वारा मिलीभगत कर आरजीएचएस में फर्जीवाड़ा कर राजकोष को भारी हानि पहुंचाई है। जांच में पाया गया कि अस्पताल की डॉक्टर संगीता अग्रवाल द्वारा आरजीएचएस में पूर्व में अनुमोदित ना होते हुए भी आरजीएचएस का बोर्ड लगाकर लाभार्थियों को आरजीएचएस से सुविधा देने का प्रलोभन दिया। अपने अस्पताल में आरजीएचएस कार्ड धारकों का इलाज किया एवं टीआईडी जनरेट करने के लिए उनके एसएसओ आईडी पासवर्ड लिए तथा उपचार उपरान्त अपने ही अस्पताल की कशिश फार्मेसी से जांचें एवं दवाइयों को फर्जी तरीके से आरजीएचएस पोर्टल पर एडजेस्ट कर भुगतान प्राप्त किया। दोनों संस्थानों ने मिलीभगत कर लाभार्थियों के नाम पर फर्जी बिल तैयार कर क्लेम स्वीकृत करवाने की कोशिश की, जिससे प्रत्यक्ष रूप से राजकोष को हानि पहुँची है। अस्पताल को आरजीएचएस योजना से पहले ही डी-एम्पेनल किया जा चुका है। अब एफआईआर की कार्रवाई की जा रही है।
बिना जरूरत के की गई जांचें
मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने बताया कि डॉ. बोथरा डायग्नोस्टिक एंड इमेजिंग सेंटर, बीकानेर द्वारा प्रस्तुत क्लेमों की जांच में पाया गया कि कई मामलों में मरीजों को आवश्यकता से अधिक जांचें लिखी गईं तथा परीक्षण रिपोर्टों में गंभीर अनियमितताएं पाई गईं। जांच में यह सामने आया कि कुछ मरीजों के लिए HbA1c, RA Factor, Procalcitonin जैसे परीक्षण दर्शाए गए, जबकि रिकॉर्ड में आवश्यक चिकित्सीय औचित्य स्पष्ट नहीं था। इसके अतिरिक्त कुछ मामलों में T2DM के लिए दर्शाए गए HbA1c टेस्ट की रिपोर्ट उपलब्ध नहीं पाई गई तथा ओपीडी स्लिप पर भी संबंधित परामर्श का उल्लेख नहीं मिला।
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चिकित्सकों के नाम एवं सील फर्जी
प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए पीबीएम राजकीय चिकित्सालय, बीकानेर के वरिष्ठ चिकित्सकों से दस्तावेजों का सत्यापन कराया गया। संबंधित चिकित्सकों के बयानों में यह तथ्य सामने आया कि जिन पर्चियों पर उनके नाम एवं सील दर्शाए गए हैं, उनमें से कई पर हस्ताक्षर एवं लेखन उनके द्वारा किया जाना स्वीकार नहीं किया गया। कुछ चिकित्सकों ने यह भी स्पष्ट किया कि संबंधित अवधि में वे अवकाश पर थे अथवा उस दिन ओपीडी में कार्यरत नहीं थे, फिर भी उनके नाम से पर्चियां एवं जांचें दर्शाई गईं। जांच में यह भी पाया गया कि कुछ पर्चियों पर दर्शाए गए चिकित्सक उस समय पीबीएम अस्पताल में पदस्थापित ही नहीं थे या उनका पंजीयन बाद की तिथि का था। सरकार ने बताया कि पूर्व में भी ऐसे मामलों में 33 अस्पतालों और 212 फार्मेसी पर कार्रवाई करते हुए उनके भुगतान और सेवाएं रोकी गई हैं तथा कई संस्थानों को डी-एम्पेनल किया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि RGHS में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।