राजस्थान में एलपीजी गैस की सप्लाई गड़बड़ाने से होस्टल का जायका बदलने लगा है। यहां की होस्टलों में रहने वाले छात्र-छात्राओं को सूखा नाश्ता मिल रहा है। इसके अलावा दोपहर और रात के भोजन की थाली से पकवान भी गायब हो गए हैं। ऐसी चीजें बनाई जा रही हैं, जो कम ईंधन में जल्दी बन जाएं।
सरकारी दावे फेल; हॉस्टल्स की मैस पर भी जबरदस्त असर
कोटा-सीकर में हॉस्टल मेस पर भी गैस सिलिंडर की कमी असर देखने को मिला है। कोटा हॉस्टल्स एसोसिएशन के अध्यक्ष नवीन मित्तल का कहना है कि सिलिंडरों की भारी किल्लत ने हॉस्टल्स की थाली खराब हो चुकी है। उन्हाेंने कहा कि कोटा में करीब 500 मेस हैं जिनमें प्रति दिन करीब 25 से 30 हजार छात्र खाना खा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने भले ही शैक्षणिक संस्थानों के लिए पर्याप्त आपूर्ति का दावा कर रही है लेकिन ऐसा धरातल पर नहीं हो रहा है। उन्होंने बताया कि हॉस्टल में पहले छात्रों को तीन डिश दी जाती थी जिसे घटाकर अब एक कर दिया गया है। सुबह-शाम भी अब ड्राई नाश्ता ही दिया जा रहा है।
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वहीं कोटा में रोजाना छात्रों को भोजन करानी वाली कई अस्थाई मेस बंद कर दी गई हैं। यहां खाना खाने वाले छात्र अन्य जगह भोजन के लिए बुकिंग करा रहे हैं। उनकी निर्भरता ऑनलाइन एप पर ज्यादा हो गई है। वहां पर भी खाद्य पदार्थों की कीमते बढ़ गई हैं। वहीं कुछ मेसों में भोजन तैयार करने के लिए लकड़ी और कोयले का सहारा लिया जा रहा है।