राजस्थान में एलपीजी संकट गहराने से होटल-रेस्टोरेंट और छोटे उद्योग प्रभावित हो रहे हैं। कमर्शियल सिलिंडर की सप्लाई घटने से बाजार में कोयला और लकड़ी की कीमतें बढ़ गई हैं। वहीं डीलरों का कहना कि गैस बुकिंग का सर्वर क्यों ठप हो रहा है। इसकी जांच होनी चाहिए। खाद्य विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की छुट्टियां सरकार ने रद्द कर दी हैं।
राजस्थान में एलपीजी की कमी से होटल, रेस्टोरेंट और हलवाई कारोबार पर संकट गहराने लगा है। प्रदेश के करीब 1.43 लाख कमर्शियल गैस उपभोक्ताओं को रोजाना 19 किलो वाले 80 हजार से 1 लाख सिलिंडर और करीब 5 लाख घरेलू सिलिंडरों की जरूरत होती है। लेकिन सरकारी तेल कंपनियों की सप्लाई रुकने से उपभोक्ताओं को जरूरत की आधी गैस भी नहीं मिल पा रही है। इसी स्थिति का फायदा उठाते हुए निजी गैस कंपनियां नए ग्राहक बनाने में जुट गई हैं। वे 2000 से 2100 रुपए की सिक्योरिटी लेकर सिलिंडर देने की पेशकश कर रही हैं। हालांकि 19 किलो का सिलिंडर बाजार में 3000 से 3200 रुपए तक बेचा जा रहा है।
सीएम ने दिए कार्रवाई के निर्देश
गैस संकट को लेकर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने बुधवार को बैठक कर गड़बड़ी करने वाली गैस एजेंसियों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के कर्मचारियों की छुट्टियां भी रद्द कर दी गई हैं।
बॉटलिंग प्लांटों में सीमित स्टॉक
प्रदेश के बॉटलिंग प्लांटों में फिलहाल 2 से 3 दिन का बैकअप ही बचा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव की स्थिति जल्द सामान्य भी हो जाए, तो गैस सप्लाई पूरी तरह पटरी पर आने में 10 से 15 दिन लग सकते हैं। वहीं खाड़ी देशों में उत्पादन घटने की स्थिति बनी रही तो सप्लाई सामान्य होने में एक महीने तक का समय लग सकता है।