राजधानी जयपुर में रविवार देर रात कोचिंग सेंटर में गैस रिसाव से बेहोश हुए छात्रों के मामले की जांच के लिए नगर निगम कमेटी कोचिंग संस्थान जाएगी। देर रात हुए हादसे के बाद एनएसयूआई छात्र संगठन और पुलिस के बीच झड़प हो गई थी। सोमवार सुबह भी छात्रों कोचिंग संस्थान के बाहर धरने पर बैठे हैं।
राज्य सरकार ने जयपुर में देर रात कोचिंग संस्थान में छात्रों के बेहोश होने की घटना की जांच की जिम्मेदारी नगर निगम को दी है। निगम की कमेटी आज कोचिंग संस्थान का दौरा करेगी। इधर पुलिस से झड़प के बाद छात्र सोमवार को भी कोचिंग संस्थान के बाहर धरने पर बैठे हैं। गौरतलब है कि रविवार रात घटना के बाद राजस्थान यूनिवर्सिटी के निवर्तमान छात्रसंघ अध्यक्ष निर्मल चौधरी सहित कई छात्र नेता समर्थकों के साथ रात मौके पर पहुंचे, जहां उनकी पुलिस से झड़प हो गई। स्थिति संभालने के लिए 6 थानों की पुलिस मौके पर बुलानी पड़ी। एसीपी सोडाला योगेश चौधरी ने बताया- कोचिंग छात्रों की हालत बिगड़ने के बाद 5 छात्राओं को एसएमएस हॉस्पिटल ले जाया गया था, जहां इलाज के बाद रात में उन्हें छुट्टी दे दी गई, जबकि दो कोचिंग छात्र सीके बिड़ला हॉस्पिटल में अब भी भर्ती हैं।
रविवार शाम क्लास के दौरान हुआ था गैस रिसाव
गौरतलब है कि महेश नगर स्थित कोचिंग में दूसरी मंजिल पर रविवार शाम करीब 6:45 बजे क्लास चल रही थी। इसी दौरान सीवरेज लाइन से उठी बदबू से स्टूडेंट बेहोश होने लगे। कोचिंग क्लासेज के प्रबंधन ने 108 एंबुलेंस को बुलाया। इस दौरान अन्य छात्रों ने बेहोश छात्र-छात्राओं को कंधे पर उठाकर बाहर निकाला और एंबुलेंस की मदद से पास के प्राइवेट अस्पताल पहुंचाया गया था। छात्र नेता कोचिंग संस्थान के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। छात्र नेता विकास विधूड़ी ने कहा- हम रात से धरने पर बैठे हैं। कोचिंग संस्थान जेडीए-नगर निगम के नियमानुसार नहीं चल रहे हैं। इसे सील किया जाए। साथ ही सभी कोचिंग संस्थान की जांच की जाए ताकि यह पता चल सके कि मापदंडों पर ये खरे हैं या नहीं। साथ ही उन्होंने दोषियों पर कार्रवाई करने की मांग भी की।
इधर घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया X पर लिखा कि "यह दुर्घटना चिंताजनक है। मैं घायल हुए विद्यार्थियों के जल्द स्वास्थ्य लाभ की कामना करता हूं।" उन्होंने कहा कि कोचिंग संस्थानों में क्षमता से अधिक छात्रों को पढ़ाना खतरनाक हो सकता है। गहलोत ने अपनी सरकार के दौरान कोचिंग संस्थानों के लिए जारी किए गए दिशा-निर्देशों और प्रतापनगर में बनाए गए कोचिंग हब का जिक्र करते हुए वर्तमान सरकार से मांग की कि इन दिशा-निर्देशों को सख्ती से लागू किया जाए।
कैबिनेट मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल मीणा ने भी घटना पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए लिखा, "मैं सभी अस्वस्थ छात्र-छात्राओं के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करता हूं।" उन्होंने इस घटना को दुखद करार दिया और छात्रों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की अपील की।
घटना के बाद उठे सवाल
इस घटना ने कोचिंग संस्थानों में बुनियादी सुविधाओं और सुरक्षा व्यवस्थाओं की कमी को उजागर किया है। छात्रों और अभिभावकों ने प्रशासन से तत्काल कदम उठाने की मांग की है ताकि ऐसी घटनाएं भविष्य में न हों। सरकार की ओर से इस मामले में क्या कदम उठाए जाएंगे, यह देखना बाकी है लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि कोचिंग हब की अवधारणा को प्राथमिकता देकर भीड़भाड़ वाले इलाकों में संचालित संस्थानों को व्यवस्थित किया जाना चाहिए।