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Jaipur News: संजय गांधी की पुण्यतिथि पर गहलोत ने दी श्रद्धांजलि, याद दिलाए कांग्रेस के फाइव प्वाइंट प्रोग्राम

Mon, 23 Jun 2025 06:11 PM IST
अर्पित याज्ञनिक न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर

सार

गहलोत ने राहुल गांधी को आज का 'सोशल रिफॉर्मिस्ट' बताया और जातिगत जनगणना को समाजिक समानता की दिशा में बड़ा कदम करार दिया। उन्होंने भारत की मौजूदा विदेश नीति पर भी चिंता व्यक्त की और इंदिरा गांधी के निर्गुट आंदोलन की तरह वैश्विक नेतृत्व की भूमिका में वापसी की जरूरत बताई।
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पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के पुत्र संजय गांधी की पुण्यतिथि के अवसर पर प्रदेश कांग्रेस कमेटी कार्यालय में आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम के बाद पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मीडिया से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने संजय गांधी के सामाजिक सुधारों और आज की विदेश नीति को लेकर विस्तार से चर्चा की।

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गहलोत ने संजय गांधी को याद करते हुए कहा कि इमरजेंसी के दौर में भले ही कांग्रेस पर कई आरोप लगे हों, लेकिन उनके द्वारा लाए गए फाइव प्वाइंट प्रोग्राम आज भी प्रासंगिक हैं। इनमें दहेज प्रथा उन्मूलन, साक्षरता बढ़ाना, जातिवाद खत्म करना, परिवार नियोजन और पौधरोपण जैसे सामाजिक मुद्दे शामिल थे। उन्होंने कहा कि यदि उस समय परिवार नियोजन पर बल न दिया गया होता, तो आज देश की जनसंख्या 180 करोड़ तक पहुंच सकती थी।



गहलोत ने कहा कि संजय गांधी के कार्यक्रम इतने क्रांतिकारी थे कि उन्होंने देश को सामाजिक सुधार की दिशा में एक नई राह दी। उन्होंने राजस्थान सरकार के प्रयासों का जिक्र करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में 'पढ़ाओ-पानी बचाओ-बिजली बचाओ-वृक्ष लगाओ' जैसे अभियानों को आगे बढ़ाया गया, जो संजय गांधी की सोच से प्रेरित थे।
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जातिगत जनगणना एक क्रांतिकारी कदम
गहलोत ने राहुल गांधी की तारीफ करते हुए कहा कि वे आज के ‘सोशल रिफॉर्मिस्ट’ बनते जा रहे हैं। उन्होंने जातिगत जनगणना को एक क्रांतिकारी कदम बताया और कहा कि इससे नीति निर्माण को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से दिशा दी जा सकेगी, जिससे SC, ST, OBC और EWS वर्गों को समान अवसर मिल सकेंगे। पूर्व मुख्यमंत्री ने कांग्रेस की ऐतिहासिक भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि आजादी से पहले और बाद में पार्टी ने हमेशा समाज सुधार और लोकतंत्र को मजबूत करने वाले निर्णय लिए। उन्होंने राजीव गांधी द्वारा 21वीं सदी की नींव रखने, 73वें और 74वें संविधान संशोधन, 18 वर्ष की उम्र में मताधिकार और सूचना प्रौद्योगिकी क्रांति की शुरुआत जैसे फैसलों को याद किया।

भारत निर्गुट आंदोलन का नेता था
बातचीत के अंत में गहलोत ने देश की वर्तमान विदेश नीति पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आज भारत की अंतरराष्ट्रीय पहचान कमजोर होती जा रही है। "इंदिरा गांधी के समय में भारत निर्गुट आंदोलन का नेता था। आज दुनिया में युद्ध और टकराव की स्थितियां हैं, अमेरिका-ईरान, इजरायल-पैलेस्टीन जैसे मसले हैं, लेकिन भारत कोई स्पष्ट स्टैंड नहीं ले पा रहा।" गहलोत ने कहा कि देश को फिर से वैश्विक मंच पर नेतृत्व की भूमिका निभानी चाहिए, जैसा कभी भारत ने नॉन-अलाइंड मूवमेंट के जरिये किया था।

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