ठेका प्रथा के विरोध में बैठे कर्मी।
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प्रदेश के 6 लाख से भी ज्यादा ठेके पर लगे हुए कर्मचारी आज सैकड़ों की संख्या में जयपुर में शहीद स्मारक पर अपनी मांग मनवाने के लिए पहुंचे।
उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपनी आखिरी बजट घोषणा में ठेका प्रथा को समाप्त किया था। अब मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा उस ठेका प्रथा को समाप्त करते हुए नियम पर जल्दी से जल्दी नोटिफिकेशन जारी करें। ठेका कर्मियों का कहना है कि ठेका प्रथा को राजस्थान से सदा के लिए समाप्त किया जाए।
ठेका कर्मियों ने अपना दर्द अमर उजाला के साथ साझा करते हुए बताया कि सरकार 15000 रुपये एक आदमी की तनख्वाह ठेकेदार को देती है, जबकि उनके हाथ में कट-कट के 5000 पहुंचते हैं। इतना ही नहीं ये पांच हजार रुपये भी कई महीनों के इंतजार के बाद उनके पास आते हैं।
इतना ही नहीं कई ठेका कर्मियों की तनख्वाह आज भी 3820 रुपये है। उनकी मांग है कि सरकार ठेका प्रथा को खत्म करें और इनको संविदा के ऊपर नौकरी करने का अवसर दे। इनका कहना है कि सरकार को इसके लिए कोई भी ज्यादा पैसे खर्च नहीं करने पड़ेंगे, क्योंकि जितना पैसा सरकार ठेकेदार को दे रही है। उतने ही पैसे में उनकी तनख्वाह निकल जाएगी।