फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जयपुर में बुजुर्ग दंपती से दो करोड़ की ठगी: 20 दिन तक रखा ‘डिजिटल अरेस्ट’, बीकानेर से दो आरोपी गिरफ्तार

Sat, 03 Oct 2026 10:06 AM IST
हिमांशु सिंह बघेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर

सार

जयपुर में साइबर ठगों ने बुजुर्ग दंपती को करीब 20 दिन तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखकर दो करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की। आरोपियों ने खुद को पुलिस, आतंकवाद रोधी दस्ता, एनआईए और आरबीआई का अधिकारी बताकर दंपती को आतंकवादी गतिविधियों और संदिग्ध बैंक लेन-देन का डर दिखाया।
विज्ञापन
साइबर क्राइम - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

साइबर ठगों ने जयपुर में एक बुजुर्ग दंपती को करीब 20 दिन तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखकर उनसे दो करोड़ रुपये से अधिक की रकम ठग ली। शातिर अपराधियों ने खुद को पुलिस, आतंकवाद रोधी दस्ते, राष्ट्रीय जांच एजेंसी और भारतीय रिजर्व बैंक का वरिष्ठ अधिकारी बताकर इस वारदात को अंजाम दिया। ठगों ने दंपती को आतंकवादी गतिविधियों से जुड़े होने और बैंक खातों में संदिग्ध लेन-देन का भारी डर दिखाया। इसके बाद आरोपियों ने बुजुर्ग दंपती को अलग-अलग बैंक खातों में भारी रकम जमा कराने के लिए विवश कर दिया। पुलिस ने इस साइबर नेटवर्क के दो मुख्य आरोपियों को बीकानेर से गिरफ्तार कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।
विज्ञापन


फोन कॉल से शुरू हुआ खौफ का सिलसिला
ठगों ने 17 अगस्त को बुजुर्ग दंपती के पास एक फोन कॉल किया। फोन करने वाले व्यक्ति ने खुद को पुलिस निरीक्षक बताया और दावा किया कि दंपती के खिलाफ कानूनी वारंट जारी हुआ है। इसके तुरंत बाद उसने फर्जी आतंकवाद रोधी दस्ते के अधिकारियों के साथ दंपती की वीडियो कॉल कराई। फर्जी अधिकारियों ने आरोप लगाया कि दंपती का नाम आतंकवादी गतिविधियों के लिए धन उपलब्ध कराने वाले लोगों की सूची में शामिल है। गिरफ्तारी और जेल जाने का गहरा डर दिखाकर अपराधियों ने बुजुर्ग दंपती को हर समय वीडियो कॉल पर रहने के लिए मजबूर कर दिया। लगातार 20 दिन तक चले इस मानसिक दबाव के कारण पीड़ित दंपती ठगों के बताए निर्देशों का लगातार पालन करते रहे।

फर्जी दस्तावेज और सरकारी मोहरों का सहारा
अपराधियों ने बुजुर्ग दंपती का विश्वास जीतने और उन पर दबाव बनाए रखने के लिए विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों, भारत सरकार और उच्चतम न्यायालय के नाम का दुरुपयोग किया। ठगों ने वॉट्सऐप पर कई तरह के फर्जी दस्तावेज, स्क्रीनशॉट और कथित बैंकिंग प्रमाण-पत्र भेजे। इन कागजात पर सरकारी मोहरें और वरिष्ठ पदों के नाम अंकित थे, ताकि पीड़ित दंपती किसी भी प्रकार का संदेह न कर सकें। फर्जी कानूनी कागजों का भय दिखाकर ठगों ने दंपती को किसी भी रिश्तेदार या पुलिस से संपर्क नहीं करने दिया और धीरे-धीरे उनकी जीवन भर की जमा पूंजी अपने खातों में ट्रांसफर करवा ली।
विज्ञापन


ये भी पढ़ें-  जयपुर में बच्चे की रोबोटिक सर्जरी से सफल इलाज: एक किडनी में थीं दो मूत्र नलिकाएं, जन्मजात विकार से मिली राहत
विज्ञापन


बीकानेर से जुड़े तार, दो गिरफ्तार
मामले की जांच के दौरान पुलिस ने उन बैंक खातों की पड़ताल की, जिनमें ठगी की रकम भेजी गई थी। जांच में बीकानेर निवासी राजूराम उर्फ राजेश और रतना राम के बैंक खातों का पता चला। जांच के अनुसार, राजूराम ने ठगी के लिए अपना बैंक खाता, चेकबुक और एटीएम कार्ड उपलब्ध कराया था। राजूराम के खाते में आए 1.50 लाख रुपये उसने निकालकर सुनील नामक व्यक्ति को सौंपे थे, जिसके बदले में राजूराम को 15 हजार रुपये का कमीशन मिला था। इसी प्रकार दूसरे आरोपी रतना राम के खाते का इस्तेमाल भी इसी फर्जीवाड़े में हुआ। रतना राम के खाते से 24 सितंबर को दो चेकों के माध्यम से कुल 8.10 लाख रुपये निकाले गए थे। यह पूरी रकम भी सुनील को दी गई और इस काम के बदले रतना राम को 7,500 रुपये का कमीशन दिया गया। पुलिस ने इन दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस अब यह पता लगा रही है कि इस साइबर नेटवर्क के तार और किन-किन लोगों से जुड़े हैं और ठगी की कुल रकम किन-किन खातों में ट्रांसफर की गई है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें