राजधानी में 13 मई 2008 को हुए सिलसिलेवार आठ बम धमाकों का दर्द 16 साल बाद आज भी पीड़ितों और चश्मदीदों को गहरा जख्म दे रहा है। धमाके के इतने साल बीतने के बाद भी आरोपियों को सजा नहीं मिल पाई है। लगातार कोर्ट के चक्कर काट रहे चश्मदीद आरोपियों को क्लीन चीट मिलने से स्वयं को ठगा महसूस कर रहे हैं। अमर उजाला के साथ अपनी बातचीत में घटना के साक्षी रहे इन लोगों ने अपने दर्द साझा किए और न्यायपालिका द्वारा दिए गए फैसलों पर सवाल उठाया।
गवाहों और पीड़ितों का कहना है कि आरोपियों को मौत की सजा दिलाने के लिए 16 साल तक कोर्ट में न जाने कितनी बार जाकर गवाही दी। कोर्ट में आरोपियों के वकील हमसे इस तरह से सवाल पूछते थे कि जैसे हम ही आरोपी हों। कई बार कोर्ट में बम धमाकों के आरोपियों से आमना-सामना होता तो उन्हें देखते ही खून खौल जाता था लेकिन न्याय की लड़ाई लड़नी थी। कोर्ट में गवाही देने के लिए 5-6 घंटे इंतजार करते। गवाहों ने कहा कि 18 दिसंबर 2019 को विशेष कोर्ट ने बम ब्लास्ट के 4 दोषियों को फांसी की सजा सुनाई तो हम अपने दर्द को भूल गए थे, लेकिन बाद में हाईकोर्ट से आरोपी के बरी होने के समाचार सुनकर तो जख्म फिर से ताजा हो गए।
जानिये इन पीड़ितों की कहानी इन्हीं की जुबानी, यहां