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खिलौनों से ज्यादा कागज-पेन था पसंद: उपलक्ष्य ने RE-NEET में रचा इतिहास, मां बोलीं- 'बेटा बचपन से था अनुशासित'

Sat, 18 Jul 2026 04:30 PM IST
जयपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर

सार

जयपुर के उपलक्ष गोयल ने री-नीट यूजी 2026 में ऑल इंडिया रैंक (AIR)-3 हासिल कर प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। कोविड-19 के दौरान डॉक्टरों की सेवा से प्रेरित होकर उन्होंने डॉक्टर बनने का सपना देखा। अनुशासन, छोटे-छोटे लक्ष्य, सोशल मीडिया से दूरी और लगातार मेहनत को उन्होंने अपनी सफलता का सबसे बड़ा मंत्र बताया।

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बेटा उपलक्ष्य और माता अनुराधा गोयल - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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जयपुर में कोविड-19 महामारी के दौरान डॉक्टरों को दिन-रात मानवता की सेवा करते देख मेडिकल क्षेत्र में आने का सपना देखने वाले जयपुर के उपलक्ष्य गोयल ने री-नीट यूजी 2026 में ऑल इंडिया रैंक (AIR)-3 हासिल कर प्रदेश का नाम रोशन किया है। उपलक्ष्य का कहना है कि डॉक्टर बनना उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज और मानवता की सेवा का माध्यम है।
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'डॉक्टरों बनना सिर्फ नौकरी नहीं'
अमर उजाला से बातचीत में उपलक्ष्य ने बताया कि कोविड काल में डॉक्टरों ने जिस समर्पण और साहस के साथ लोगों की जान बचाई, उसने उन्हें गहराई से प्रभावित किया। तभी उन्होंने तय कर लिया था कि वह भी डॉक्टर बनकर समाज की सेवा करेंगे। उन्होंने कहा है कि 'डॉक्टर बनना मेरे लिए सिर्फ नौकरी नहीं, बल्कि सेवा का माध्यम है।'
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बचपन से ही आत्मअनुशासित रहा
उपलक्ष्य की मां अनुराधा गोयल ने बताया कि उनका परिवार एक मध्यमवर्गीय परिवार है। उन्हें विश्वास था कि बेटा नीट परीक्षा में सफल होगा, लेकिन पूरे देश में तीसरी रैंक हासिल करेगा इसकी उम्मीद नहीं थी। उन्होंने कहा कि उपलक्ष्य को कभी पढ़ाई के लिए टोकना नहीं पड़ा। वह बचपन से ही आत्मअनुशासित रहा है और अपनी पढ़ाई की पूरी जिम्मेदारी स्वयं संभालता था। इतना ही नहीं, कभी ऐसी स्थिति भी नहीं आई, जब उन्हें उसे डांटना या नाराज होकर उस पर हाथ उठाना पड़ा हो।

घंटों चित्रकारी करता रहता था उपलक्ष
मां अनुराधा गोयल ने बताया कि बचपन में उपलक्ष्य को खिलौनों की बजाय कागज और पेन अधिक पसंद थे। वह घंटों चित्रकारी करता रहता था। परिवार में उनकी बड़ी बहन फिजियोथेरेपिस्ट हैं और अब उपलक्ष्य डॉक्टर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। मां ने कहा कि वह चिकित्सा के जिस भी क्षेत्र में रुचि लें, उसी में आगे बढ़ें और लोगों की सेवा करें, यही उनकी सबसे बड़ी इच्छा है। उपलक्ष्य ने बताया कि नीट यूजी 2026 की पहली परीक्षा में भी उनके लगभग 710 अंक आने की संभावना थी, लेकिन पेपर लीक और अपेक्षाकृत आसान प्रश्नपत्र के कारण उनकी रैंक उम्मीद के अनुरूप नहीं बन पा रही थी। री-नीट में भी उनके करीब 710 अंक आए, लेकिन कठिन प्रश्नपत्र के कारण उनकी रैंक सुधरकर देश में तीसरे स्थान पर पहुंच गई।
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उपलक्ष ने छोटे-छोटे लक्ष्यों में बांटकर तैयारी
अपनी सफलता का राज बताते हुए उपलक्ष्य ने कहा कि उन्होंने पूरे पाठ्यक्रम को छोटे-छोटे लक्ष्यों में बांटकर तैयारी की। हर लक्ष्य पूरा करने के बाद अपनी कमियों की समीक्षा की और हमेशा खुद के प्रति ईमानदार रहे। उन्होंने सोशल मीडिया से पूरी तरह दूरी बनाए रखी। तनाव दूर करने के लिए वह केवल 'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' देखते थे। उन्होंने विद्यार्थियों को संदेश देते हुए कहा कि असफलता से निराश होने के बजाय अपने लक्ष्य, अनुशासन, शिक्षकों के मार्गदर्शन और ईमानदार मेहनत पर भरोसा रखें, क्योंकि सफलता की यही असली कुंजी है।

 

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