विमोचन करते राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े
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राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने सोमवार को राजस्थान विधानसभा के 75 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर नवनिर्मित प्रतीक चिन्ह का विमोचन किया। इस दौरान विधानसभा परिसर के 13 द्वारों का नामकरण भी किया गया। कार्यक्रम में विधानसभा की लोकतांत्रिक परंपरा, सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक योगदान को रेखांकित किया गया।
राज्यपाल ने कहा कि विधानसभा लोकतंत्र का पवित्र सदन है और राजस्थान विधानसभा का गौरवशाली इतिहास रहा है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र भारत में भले ही विधानसभा का गठन 1952 में हुआ, लेकिन राजस्थान में इसकी शुरुआत 1913 में ही हो गई थी, जब महाराजा गंगासिंह ने प्रतिनिधि सभा की स्थापना की थी। उन्होंने अमृतकाल में नए प्रतीक चिन्ह के लोकार्पण को ऐतिहासिक क्षण बताया।
उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी की पहल की सराहना करते हुए कहा कि नया लोगो राजस्थान के जनमानस की भावना और सांस्कृतिक पहचान को दर्शाता है। प्रतीक चिन्ह में राज्य पुष्प रोहिड़ा, खेजड़ी वृक्ष और विधान भवन की आकृतियों को शामिल किया गया है। राज्यपाल ने कहा कि यह राजस्थान की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में भी उत्सवधर्मिता और संघर्षशील जीवनशैली का प्रतीक है। उन्होंने खेजड़ी को राजस्थान का कल्पवृक्ष बताते हुए खेजड़ली बलिदान की परंपरा का उल्लेख किया।
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कार्यक्रम में राज्यपाल ने भारत की पहली लोकसभा के अध्यक्ष गणेश वासुदेव मालवंकर से जुड़ा एक प्रसंग साझा किया। उन्होंने कहा कि जीवन में संसाधनों का सही प्रबंधन और आदर्श आचरण अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने और गरीब तथा पिछड़े वर्गों तक गुणवत्तापूर्ण व व्यवहारिक शिक्षा पहुंचाने पर जोर दिया।
राज्यपाल ने महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष के रूप में अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि लोकतंत्र तभी मजबूत होता है जब नागरिक अधिकारों के साथ अपने कर्तव्यों के प्रति भी सजग रहें। उन्होंने विधानसभा द्वारों के नामकरण में राजस्थान की वीरता और गौरव से जुड़े स्थलों को शामिल किए जाने की सराहना की।
कार्यक्रम के दौरान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी, राजस्थान विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली सहित कैबिनेट के मंत्रीगण भी उपस्थित रहे।