सार
यमुना जल को राजस्थान तक पहुंचाने की परियोजना की डीपीआर छह महीने में तैयार होगी। केंद्र सरकार ने लोकसभा में बताया कि राजस्थान और हरियाणा के बीच MoU हुआ है। हथिनीकुंड बैराज से चूरू, सीकर व झुंझुनूं तक भूमिगत पाइपलाइन से पानी लाया जाएगा। अपर यमुना नदी बोर्ड के अनुसार जुलाई से अक्टूबर तक राजस्थान को 577 एमसीएम पानी मिलेगा। नवंबर से जून तक कोई आवंटन नहीं होगा।
यमुना जल को राजस्थान तक पहुंचाने की महत्वाकांक्षी परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) छह महीने के भीतर तैयार कर ली जाएगी। केंद्र सरकार ने शुक्रवार को लोकसभा में यह जानकारी दी। इसके साथ ही बताया गया कि मानसून अवधि के दौरान राजस्थान को यमुना नदी से 577 मिलियन क्यूबिक मीटर (एमसीएम) पानी आवंटित किया गया है। लोकसभा में एक तारांकित प्रश्न के जवाब में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने बताया कि राजस्थान और हरियाणा सरकार के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इसके तहत हथिनीकुंड बैराज से भूमिगत पाइपलाइन के माध्यम से चूरू, सीकर और झुंझुनूं सहित राजस्थान के जल-अभावग्रस्त जिलों तक यमुना जल पहुंचाने के लिए संयुक्त रूप से डीपीआर तैयार की जाएगी।
अपर यमुना नदी बोर्ड के निर्णय के अनुसार, राजस्थान को जुलाई से अक्टूबर तक 577 एमसीएम यमुना जल आवंटित किया गया है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि नवंबर से जून की अवधि में हथिनीकुंड बैराज से राजस्थान को कोई पानी नहीं मिलेगा।
परियोजना के पहले चरण के तहत मानसून महीनों में अधिकतम 577 एमसीएम पानी भूमिगत पाइपलाइन के जरिए पेयजल और अन्य आवश्यकताओं के लिए स्थानांतरित किया जाएगा। यह व्यवस्था हरियाणा द्वारा पश्चिमी यमुना नहर की पूरी क्षमता, जिसमें दिल्ली का हिस्सा भी शामिल है, के उपयोग के बाद लागू होगी। केंद्र सरकार ने बताया कि परियोजना के लिए राजस्थान और हरियाणा दोनों राज्यों ने टास्क फोर्स का गठन किया है। राजस्थान सरकार ने 25 जुलाई 2025 को डीपीआर तैयार करने के लिए कंसल्टेंट नियुक्त किया है, जिसे छह महीने में रिपोर्ट सौंपनी होगी। डीपीआर पूरी होने के बाद परियोजना के क्रियान्वयन का मार्ग प्रशस्त होगा, जिससे राजस्थान के कई जिलों में पेयजल संकट कम होने की उम्मीद है।
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