विधायक एवं पूर्व मंत्री डॉ. सुभाष गर्ग ने भरतपुर को एनसीआर और टीटीजेड से बाहर निकालने की मांग आज विधानसभा में बजट पर बहस के दौरान उठाई। गर्ग ने भरतपुर के औद्योगिक विकास के साथ-साथ अन्य कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए, बल्कि राज्य स्तर की कई समस्याओं की ओर भी भजनलाल सरकार का ध्यान आकर्षित किया।
भरतपुर क्षेत्र से जुड़े प्रमुख मुद्दों में यमुना का पानी, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, आरबीएम अस्पताल में सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं समेत कई मामले शामिल हैं। बजट बहस में सम्मिलित होते हुए डॉ. सुभाष गर्ग ने सबसे पहले मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का इस बात के लिए आभार व्यक्त किया कि भरतपुर क्षेत्र के लिए बजट में कई घोषणाएं की गई हैं।
उन्होंने कहा कि इसके बावजूद भरतपुर संभाग मुख्यालय होने के बावजूद विश्वविद्यालय के लिए तरस रहा है। यह उच्च शिक्षा के लिए जो संस्थान होने चाहिए, वे वहां नहीं है। इसलिए विद्यार्थियों को बाहर जाना पड़ता है। इससे उनके परिजनों पर आर्थिक भार भी बढ़ता है।
डॉ. गर्ग ने सदन को बताया कि एनसीआर और टीटीजेड में होने की वजह से वहां नई इंडस्ट्रीज नहीं आ पा रही हैं। जो पुरानी इंडस्ट्रीज वहां है, वे भी बंद हो गई हैं। इसलिए अब यहां सबसे ज्यादा जरूरत तकनीकी संस्थानों की है। भरतपुर में आईटी हब बनाए जाने की जरूरत है। इसके साथ ही यहां स्पेशल इलेक्ट्रॉनिक हब बनाए जाने की जरूरत है, ताकि युवाओं के लिए रोजगार के अधिकतम अवसर पैदा हो सकें।
भरतपुर को मिले हिस्से का पूरा यमुना पानी
डॉ. सुभाष गर्ग ने कहा कि भरतपुर की सबसे पुरानी और बड़ी समस्या है यमुना का पानी। उन्होंने कहा कि साल 1994 में 5 राज्यों के बीच यमुना जल समझौता हुआ था। इसके तहत डीग और भरतपुर जिलों को यमुना से 1281 क्यूसेक पानी मिलना था। लेकिन, दुर्भाग्य से अभी 800 क्यूसेक पानी ही मिल पा रहा है।
करीब 400-450 क्यूसेक पानी भरतपुर-डीग को उनके हिस्से का मिलना बाकी है। उन्होंने कहा कि इसके लिए हरियाणा से कोई सहमति आनी थी। वह अभी तक नहीं आई है। जिस तरह मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने हाल ही हरियाणा से बात करके चूरू-झुंझुनू के लिए जल समझौता किया है और उसके तहत उन्हें ताजेवाला हैड से पानी मिलना तय हुआ है। उसी तरह डीग और भरतपुर जिलों को भी ओखला हैड से पूरा पानी मिलना चाहिए।
भरतपुर के लिए ये मांगें भी रखी सदन में
डॉ. सुभाष गर्ग ने सदन में भरतपुर की मांगें रखते हुए कहा कि पिछली बजट घोषणाओं के तहत आरबीएम अस्पताल में जल्द ही 10 सुपर स्पेशियलिटी सेवाएं जल्द शुरू की जानी चाहिए। इसके साथ ही ऊंदरा, बरसो, गामरी समेत अन्य जगह प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खोले जाने चाहिए।
हालांकि हाल ही बजट में भरतपुर के लिए 2 ग्रिड सब स्टेशनों की घोषणा की गई है। लेकिन, जाटोली रथभान में भी एक जीएसएस मंजूर किया जाना चाहिए। उनके गांव पीपला में अस्थाई पुलिस चौकी खोली गई थी, जिसे स्थाई करते हुए भवन बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जल जीवन मिशन के कार्य नगरीय निकायों और पंचायतों को सौंपे जाने चाहिए।
विश्वविद्यालयों में कुलगुरू के नाम पर पुनर्विचार हो
विश्वविद्यालय शिक्षकों की पेंशन संबंधी मुद्दा उठाते हुए डॉ. गर्ग ने सरकार से आग्रह किया कि शिक्षकों की मांग सुनी जाए। इसी तरह हाल ही में विश्वविद्यालयों में कुलपति का नाम कुलगुरू किया गया है। इस पर पुनर्विचार किए जाने की जरूरत है। क्योंकि कुलपति अस्थाई होता है, बदलते रहते हैं। लेकिन, कुलगुरू स्थाई होता है।
राज्यों के वित्तीय हालात बिगड़ रहे हैं
वित्तीय मामलों पर बोलते हुए डॉ. गर्ग ने कहा कि जब से केंद्र सरकार ने जीएसटी लागू किया है, उसके बाद से राज्यों के रेवेन्यू सोर्सेज कम होते जा रहे है। स्टेट फाइनेंस की पोजीशन लगातार खत्म होती जा रही है। वित्त आयोग की सिफारिशों के तहत राज्यों को जो अनुदान मिलता है, उसे 42 प्रतिशत से घटाकर 41 प्रतिशत कर दिया गया है। इसे बढ़ाया जाना चाहिए।