जयपुर के बिचुन क्षेत्र स्थित भैराणा धाम में इन दिनों संतों का अनोखा विरोध प्रदर्शन चर्चा का विषय बना हुआ है। भीषण गर्मी और 42 से 45 डिग्री तापमान के बीच संत उपलों की अग्नि जलाकर ‘अग्नि तप’ कर रहे हैं। यह विरोध केवल पर्यावरणीय मुद्दा नहीं बल्कि आस्था, परंपरा और धार्मिक अस्तित्व से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है।
दादू संप्रदाय से जुड़े संतों का कहना है कि यह स्थान संत दादू दयाल की तपोभूमि और मोक्ष स्थली है, जिसे राजस्थान राज्य औद्योगिक विकास एवं निवेश निगम (रीको) द्वारा ‘इन्वेस्टमेंट जोन’ के रूप में विकसित करने की योजना बनाई जा रही है।
संघर्ष समिति का आरोप है कि सरकारी दस्तावेजों में इस क्षेत्र को ‘झाड़ियां’ बताकर पर्यावरणीय मंजूरी ली गई, जबकि हकीकत में यहां हजारों हरे-भरे पेड़ मौजूद थे, जिन्हें काट दिया गया। संतों का दावा है कि 30 हजार से अधिक पेड़ काटे जा चुके हैं, जिससे वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास भी प्रभावित हुआ है।
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5 अप्रैल को प्रशासन को ज्ञापन देकर 10 दिन का अल्टीमेटम दिया गया था, लेकिन कार्रवाई नहीं होने पर 15 अप्रैल से संतों ने अग्नि तप शुरू कर दिया। इस आंदोलन में राजस्थान के विभिन्न धामों से संत पहुंचकर समर्थन दे रहे हैं। दादू मोदाचार्य गोपालदास महाराज सहित कई प्रमुख संतों ने स्पष्ट किया है कि जब तक औद्योगिक परियोजना निरस्त नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा।
उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा भी मौके पर पहुंचे और संतों से बातचीत की, लेकिन संतों ने उनके आश्वासनों को अपर्याप्त बताया। संत रतन जी के अनुसार, 2 मई तक अग्नि तप जारी रहेगा और उसी दिन आगे की रणनीति तय की जाएगी, जिसमें 16 किलोमीटर की पर्वतमाला की परिक्रमा भी शामिल है।
इस दौरान एक साधु की तबीयत बिगड़ने की घटना भी सामने आई, जिन्हें डिहाइड्रेशन के चलते बेहोशी आ गई। बावजूद इसके संत तप जारी रखे हुए हैं। संतों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने ध्यान नहीं दिया तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा, चाहे इसके लिए प्राणों की आहुति ही क्यों न देनी पड़े।